अमेरिका में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को लेकर एक बड़ा संवैधानिक विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी कांग्रेस के बीच इस बात को लेकर भारी खींचतान चल रही है कि सेना को ईरान में रखने का अधिकार किसके पास है। मामला ‘वॉर पावर्स एक्ट’ से जुड़ा है और अब सबकी नजरें 1 मई की समयसीमा पर टिकी हैं।
वॉर पावर्स एक्ट क्या है और 1 मई की तारीख क्यों जरूरी है?
अमेरिका के 1973 के ‘युद्ध शक्तियों के अधिनियम’ (War Powers Act) के मुताबिक, राष्ट्रपति किसी सैन्य अभियान को केवल 60 दिनों तक चला सकते हैं। अगर इसके बाद भी कार्रवाई जारी रखनी है, तो कांग्रेस से मंजूरी लेना जरूरी होता है। इस मामले में मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- 28 फरवरी 2026: अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर हवाई हमले शुरू किए।
- 2 मार्च 2026: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कांग्रेस को इसकी औपचारिक जानकारी दी, जिससे 60 दिन की कानूनी समयसीमा शुरू हो गई।
- 1 मई 2026: यह वह आखिरी तारीख है जब तक ट्रंप प्रशासन को सैन्य कार्रवाई के लिए कांग्रेस से अनुमति लेनी होगी, वरना सैनिकों को वापस बुलाना होगा।
ट्रंप प्रशासन और विपक्षी नेताओं के बीच क्या विवाद है?
इस कानूनी लड़ाई में दोनों पक्षों के तर्क बिल्कुल अलग हैं। ट्रंप प्रशासन का मानना है कि वे कानून का पालन कर रहे हैं, जबकि डेमोक्रेट नेता इसे नियम का उल्लंघन बता रहे हैं।
- सरकार का पक्ष: रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने सीनेट में गवाही दी कि 7 अप्रैल से शुरू हुए संघर्ष विराम (Ceasefire) ने 60 दिन की समयसीमा को रोक दिया है। प्रशासन का कहना है कि संघर्ष विराम के कारण युद्ध प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है।
- विपक्ष का पक्ष: सीनेट के डेमोक्रेटिक नेता चक शूमर और एडम शिफ का कहना है कि संघर्ष विराम समयसीमा को नहीं रोकता। उनके अनुसार, 1 मई के बाद बिना मंजूरी के कार्रवाई करना संघीय कानून का उल्लंघन होगा।
- सीनेट वोटिंग: हाल ही में सीनेट ने अमेरिकी सैनिकों को हटाने के एक प्रस्ताव को 47-50 के वोट से खारिज कर दिया। इसमें रिपब्लिकन नेता सुसान कोलिन्स और रैंड पॉल ने डेमोक्रेट्स का साथ दिया।
ईरान की प्रतिक्रिया और ताजा हालात क्या हैं?
इस तनाव के बीच ईरान ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने कहा कि अमेरिका संघर्ष विराम के बावजूद नौसैनिक नाकेबंदी के जरिए दबाव बना रहा है। दूसरी तरफ, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि वह ईरान युद्ध के विरोध के कारण इटली और स्पेन से अमेरिकी सैनिकों को वापस बुला सकते हैं। तेहरान में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और ईरान के सर्वोच्च नेता ने अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं की रक्षा करने की बात कही है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी क्या था?
यह 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर शुरू किए गए हवाई हमलों का नाम था, जिससे इस पूरे विवाद की शुरुआत हुई।
क्या अमेरिकी सीनेट ने सैनिकों को हटाने का फैसला लिया?
नहीं, सीनेट ने सैनिकों को हटाने के उद्देश्य से लाए गए प्रस्ताव को 47-50 के मतदान से खारिज कर दिया, जिससे ट्रंप प्रशासन को फिलहाल राहत मिली है।