अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। दोनों देशों ने अभी कुछ दिन पहले ही शांति के लिए एक समझौते (MoU) पर हस्ताक्षर किए थे, लेकिन अब फिर से मिसाइल और ड्रोन हमले शुरू हो गए हैं। इस टकराव से पूरे खाड़ी क्षेत्र में डर का माहौल है क्योंकि हमले अब कुवैत और बहरीन जैसे देशों तक पहुँच चुके हैं।

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समझौता हुआ पर जंग फिर शुरू

17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने 14 पॉइंट के एक समझौते पर साइन किए थे। इस समझौते का मुख्य मकसद सैन्य अभियानों को रोकना, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलना और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी को खत्म करना था। दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर एक व्यापक डील करने का वादा किया था।

लेकिन यह शांति बहुत कम समय के लिए रही। 20 जून को ईरान ने इस समुद्री रास्ते को बंद करने का ऐलान किया और कहा कि अमेरिका और इसराइल ने समझौते की शर्तों को तोड़ा है। इसके बाद 25 जून को ईरान के IRGC ने ‘Ever Lovely’ नाम के एक व्यापारिक जहाज पर ड्रोन से हमला कर दिया और चेतावनी दी कि सभी जहाजों को ईरान के बताए रास्ते का ही पालन करना होगा।

अमेरिका का पलटवार और बहरीन-कुवैत पर हमला

जहाज पर हुए हमले के बाद अमेरिका ने कड़ा एक्शन लिया। 26 और 27 जून को अमेरिकी सेना ने ईरान के सैन्य ठिकानों, मिसाइल स्टोरेज और रडार सेंटरों पर हवाई हमले किए। राष्ट्रपति Trump ने ईरान पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया और कहा कि अगर स्थिति नहीं सुधरी तो वह इस काम को सैन्य रूप से पूरा करेंगे।

ईरान ने अमेरिकी हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया। इसके जवाब में ईरान ने 27 जून को कुवैत के Ali Al Salem एयर बेस और बहरीन में स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट (Fifth Fleet) मुख्यालय पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दागे। 28 जून को भी दोनों देशों के बीच गोलाबारी और हमले जारी रहे।

रास्ते और फीस पर छिड़ा विवाद

इस पूरी लड़ाई के पीछे होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के आने-जाने का विवाद है। मुख्य बातें इस प्रकार हैं:

  • ईरान का पक्ष: ईरान का कहना है कि वह इस समुद्री रास्ते का नियंत्रण रखता है और जहाज केवल उसके बताए रूट से ही गुजरें। ईरान के संसद स्पीकर ने संकेत दिया है कि 60 दिनों के बाद वह जहाजों से सर्विस फीस भी लेंगे।
  • अमेरिका और ओमान का पक्ष: अमेरिका और ओमान ने ओमान तट के साथ एक दक्षिणी शिपिंग लेन का सुझाव दिया है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने साफ किया है कि अमेरिका किसी एक देश का नियंत्रण स्वीकार नहीं करेगा और न ही किसी फीस को मंजूरी देगा।

इस तनाव के बीच IAEA के चीफ Rafael Grossi ने बताया कि हमलों की वजह से ईरान के परमाणु कार्यक्रम की कई गतिविधियां रुक गई हैं। फिलहाल स्थिति बहुत नाजुक बनी हुई है और दोनों देश एक-दूसरे पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगा रहे हैं।