अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को एक अहम समझौते (MOU) पर दस्तखत किए हैं। इसका मुख्य मकसद आपसी संघर्ष को खत्म करना और Strait of Hormuz को दोबारा खोलना है। अब अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच बातचीत चलेगी ताकि एक अंतिम समझौते पर पहुंचा जा सके।

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इस 60 दिन की बातचीत के दौरान ईरान के परमाणु कार्यक्रम, यूरेनियम संवर्धन के स्तर और अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने जैसे जरूरी मुद्दों पर चर्चा होगी। अमेरिका का खजाना विभाग (US Treasury) ईरान के तेल, पेट्रोकेमिकल्स और उससे जुड़ी चीजों पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए 60 दिन की विशेष छूट देने की तैयारी कर रहा है।

निरीक्षण को लेकर बयानों में अंतर

परमाणु साइटों की जांच को लेकर अमेरिका और ईरान के दावों में अंतर दिख रहा है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने 22 जून 2026 को कहा था कि ईरान UN के निरीक्षकों को वापस आने देने के लिए तैयार हो गया है। हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baqaei ने इस बात से साफ तौर पर इनकार किया है। दूसरी ओर, राष्ट्रपति Trump ने 23 जून को कहा कि ईरान पूरी तरह सहमत है, लेकिन उन्होंने यह भी जोड़ा कि इसमें कोई जल्दबाजी नहीं है।

एक्सपर्ट की राय

भले ही MOU साइन हो गया है, लेकिन विशेषज्ञ Charles Kupchan का मानना है कि 60 दिनों के भीतर कोई अंतिम समझौता होना काफी मुश्किल है। उन्होंने मार्च 2026 में ही संकेत दिया था कि बातचीत बहुत लंबी खिंच सकती है। उनका कहना था कि वह इस बात से हैरान नहीं होंगे अगर Trump प्रशासन के कार्यकाल के खत्म होने तक कोई फाइनल डील नहीं हो पाती है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.