अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध को खत्म करने के लिए एक समझौता (MoU) हुआ है। हिजबुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने इसे एक बड़ी जीत बताया है। उन्होंने कहा कि इस समझौते से अमेरिकी ताकत कम हुई है और ईरान की सरकार को गिराने का मकसद नाकाम रहा है।
इस समझौते पर 14 जून 2026 को डिजिटल साइन किए गए थे। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दिन अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाने की बात कही थी। इस डील में यह तय हुआ है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई पूरी तरह और हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी।
अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि इस समझौते में 14 मुख्य बातें शामिल हैं। इसके तहत ईरान अब अपना तेल निर्यात कर सकेगा। साथ ही, ईरान ने अगले 60 दिनों तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों के लिए रास्ता मुफ्त और सुरक्षित रखने का वादा किया है।
परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक मदद
ईरान ने अपने परमाणु स्टॉकपाइल को नष्ट करने के लिए IAEA की निगरानी में काम करने पर सहमति जताई है। अगर ईरान परमाणु नियमों को मानता है, तभी उस पर लगे प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएंगे। इसके अलावा, अमेरिका और उसके साथी देशों द्वारा ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का प्लान तैयार किया जाएगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ किया है कि यह कोई अंतिम समझौता नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने ठीक से व्यवहार नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उन्होंने इस डील को करवाने में पाकिस्तान और कतर की मदद की भी तारीफ की है।
इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के बर्गेंस्टॉक रिसॉर्ट में होंगे। इसके बाद परमाणु कार्यक्रम पर तकनीकी बातचीत के लिए 60 दिन का समय मिलेगा।
दूसरी तरफ, हिजबुल्लाह ने साफ कहा है कि लेबनान और इसराइल के बीच बातचीत सिर्फ सुरक्षा पर होनी चाहिए। हिजबुल्लाह ने यह भी कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौता तभी पूरा होगा जब इसराइल लेबनान की जमीन से पूरी तरह बाहर निकल जाएगा।