अमेरिका और ईरान के बीच एक अहम समझौता (MOU) हुआ है, जिसकी आधिकारिक जानकारी अब दुनिया के सामने आने वाली है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया है कि इस समझौते का पूरा टेक्स्ट आने वाले शुक्रवार को जारी किया जाएगा। इस डील से दुनिया भर की नजरें अब मिडिल ईस्ट की शांति और व्यापारिक रास्तों पर टिकी हैं।

कब और कहाँ होगा हस्ताक्षर

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के अधिकारियों ने 14 या 15 जून 2026 को डिजिटल तरीके से इस समझौते पर साइन कर दिए थे। अब इसका औपचारिक और आमने-सामने का साइनिंग प्रोग्राम शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होने की उम्मीद है। इसी दिन इस समझौते की पूरी जानकारी भी पब्लिक की जाएगी।

क्या है इस समझौते में

उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि यह एक सामान्य दस्तावेज है जो करीब डेढ़ पेज का है। यह कोई आखिरी डील नहीं है, बल्कि एक ढांचा है जिसके तहत आगे 60 दिनों तक ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों पर तकनीकी बातचीत होगी। उन्होंने साफ किया कि ईरान की जमी हुई संपत्ति तभी छोड़ी जाएगी जब ईरान अपने यूरेनियम के भंडार को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाएगा।

ट्रंप और अन्य नेताओं का क्या कहना है

  • डोनाल्ड ट्रंप: अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस डील को पूरा बताया और कहा कि इससे ईरान के साथ युद्ध खत्म होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) फिर से खुलेगा। उन्होंने दावा किया कि अब ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता।
  • ईरानी अधिकारी: ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री माजिद तख्त-रवांची ने कहा कि अगर इसराइल ने समझौते का उल्लंघन किया तो इसमें एक विशेष मैकेनिज्म लागू होगा। वहीं विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसराइली सेना की लेबनान से वापसी की शर्त रखी है।
  • अन्य देश: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस शांति समझौते की घोषणा की। नाटो चीफ मार्क रूट और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस डील का स्वागत किया है।

तनाव और सुरक्षा की स्थिति

एक तरफ जहां समझौते की बात हो रही है, वहीं दूसरी तरफ तनाव भी बना हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, डिजिटल साइनिंग के बावजूद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य में कमर्शियल जहाजों की तरफ कई ड्रोन दागे, जिन्हें अमेरिकी सेना ने बीच में ही रोक दिया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को अब भी डर है कि ईरान जब चाहे इस समुद्री रास्ते को बंद कर सकता है।

इन देशों ने कराई मध्यस्थता

इस बड़े समझौते को करवाने में पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, मिस्र और तुर्की जैसे देशों ने अहम भूमिका निभाई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगा अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी अब हटा ली गई है और यह रास्ता लंबे समय के लिए टोल-फ्री रहेगा।

Praggya Singh sabal

Journalist from Noida. Covering Delhi, NCR and National Updates.