अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। एक अमेरिकी अधिकारी ने बताया है कि दोनों देशों के बीच हुआ समझौता यानी एमओयू आधिकारिक तौर पर लागू हो गया है। इस समझौते के लागू होते ही अब जंग की स्थिति पर लगाम लगाने की तैयारी शुरू हो चुकी है, जिससे दुनिया भर के बाजारों और तेल की कीमतों में भी बदलाव देखने को मिल रहा है।
इस समझौते पर 14 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने डिजिटल तरीके से दस्तखत किए थे। अब स्विट्जरलैंड में 19 जून 2026 को इसके लिए एक औपचारिक दस्तखत समारोह रखा गया है। इस समझौते के लागू होते ही सभी मोर्चों पर, जिसमें लेबनान भी शामिल है, सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए बंद करना होगा। इसके अलावा, अमेरिका ईरान के खिलाफ लगाए गए समुद्री प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया तुरंत शुरू करेगा और इसे 30 दिनों के भीतर पूरा कर लिया जाएगा।
ईरान को भी इस समझौते के तहत 30 दिनों के भीतर हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से व्यापारिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले वाली स्थिति में बहाल करना होगा। इसके साथ ही कम से कम 60 दिनों तक जहाजों को बिना किसी टोल टैक्स के सुरक्षित रास्ता देना होगा।
समझौते की मुख्य बातें और ट्रंप की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस समझौते को लेकर बड़ा बयान जारी किया है। ट्रंप ने साफ कहा है कि यह समझौता अभी आखिरी फैसला नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपनी हरकतों में सुधार नहीं किया या बातचीत ठीक से नहीं चली, तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई शुरू कर सकता है। हालांकि, ट्रंप ने यह भी बताया कि समझौते की खबर से शेयर बाजार में भारी उछाल आया है और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से नीचे गिर रही हैं। दूसरी तरफ, इजरायली अधिकारियों ने इस समझौते को लेकर संदेह जताया है और उन्हें इस दस्तावेज की पूरी जानकारी नहीं दी गई है।
इन बड़ी शर्तों पर बनी है दोनों देशों के बीच सहमति
- सैन्य कार्रवाई पर रोक: लेबनान सहित सभी मोर्चों पर सैन्य हमले तुरंत रोकने का फैसला हुआ है और देश की संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।
- तेल प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका ईरान के कच्चे तेल और पेट्रोलियम उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों में अस्थायी रूप से छूट देगा और ईरान के रोके गए पैसों को जारी करेगा।
- परमाणु हथियारों पर रोक: ईरान ने फिर से दोहराया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। परमाणु मुद्दे पर अंतिम फैसला 60 दिनों की बातचीत के बाद होने वाले अंतिम समझौते में लिया जाएगा।
- वार्ता का समय: औपचारिक दस्तखत के बाद दोनों देशों को अंतिम समझौता तैयार करने के लिए 60 दिनों का समय मिलेगा, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया भी जा सकता है।
सहयोगी देशों की भूमिका
इस पूरे मामले में पाकिस्तान, सऊदी अरब, कतर, मिस्र और तुर्की ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। अमेरिका इस समझौते के बाद क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के लिए 300 अरब डॉलर के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास योजना पर काम करने की तैयारी कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) से भी इस समझौते को मंजूरी मिलने की उम्मीद है।