अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता खत्म, 60 दिन का MoU समाप्त होने से बढ़ी तनाव की स्थिति

अमेरिका और ईरान के बीच हुआ 60-दिन का समझौता सोमवार, 17 अगस्त 2026 को खत्म हो गया। इस शांति समझौते के खत्म होने से दोनों देशों के बीच तनाव फिर से बढ़ने का डर पैदा हो गया है, क्योंकि शांति वार्ता में कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। जून के महीने में इस समझौते को कराने में मुख्य रूप से पाकिस्तान ने मध्यस्थता की थी। इस समझौते के तहत तुरंत लड़ाई रोकने, समुद्र में लगे प्रतिबंधों को हटाने और 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण पैकेज देने की बात कही गई थी। लेकिन दोनों देशों की तरफ से नियमों का पालन न करने के आरोप लगने के बाद यह योजना जल्दी ही कमजोर पड़ गई।
समझौते के दौरान किन बातों पर हुआ विवाद
इस समझौते के लागू होने के बाद से ही कूटनीतिक प्रक्रिया को बहुत सी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump का यह साफ कहना रहा है कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता है। वहीं दूसरी तरफ तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूरा नियंत्रण होने की बात कही और यह साफ कर दिया कि जब तक अमेरिका अपने प्रतिबंध नहीं हटाएगा तब तक वे वहां अपनी नाकेबंदी जारी रखेंगे। समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर कुछ संकेत मिले थे, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने यह स्पष्ट कर दिया कि इस समय कोई भी नई बातचीत शुरू नहीं हो रही है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और भविष्य की चिंताएं
जैसे-जैसे संघर्ष विराम का समय खत्म हो रहा है, वैसे-वैसे लोगों में यह डर बढ़ता जा रहा है कि अगर कोई पक्का समझौता नहीं हुआ तो मामला और ज्यादा बिगड़ सकता है। खुफिया रिपोर्टों से यह जानकारी मिली है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने शांति के इस छोटे से समय का इस्तेमाल अपनी सैन्य ताकत को बढ़ाने और इलाके में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए किया है। खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों और वहां सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी यह स्थिति चिंता का विषय बनती जा रही है, क्योंकि किसी भी बड़े विवाद का असर सीधे तौर पर वहां की सुरक्षा और काम-काज पर पड़ता है।