अमेरिका और ईरान ने युद्ध को खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता किया है, जिसे MOU कहा जा रहा है। इस खबर के बाद पूरी दुनिया में शांति की उम्मीद जगी थी, लेकिन दक्षिणी लेबनान के लोग अभी भी डरे हुए हैं। इसराइल ने साफ कह दिया है कि वह अपनी सेना को लेबनान की सीमा से तब तक नहीं हटाएगा जब तक उसके इलाके पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाते।
समझौते में क्या तय हुआ
अमेरिका और ईरान ने 17 जून 2026 को इस समझौते पर दस्तखत किए। इसमें 14 मुख्य बातें शामिल हैं, जिनका मकसद सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए रोकना है। इस समझौते के कुछ बड़े बिंदु नीचे दिए गए हैं:
- दोनों देश एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई नहीं करेंगे।
- लेबनान की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान किया जाएगा।
- अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर ईरान पर लगी समुद्री नाकाबंदी पूरी तरह हटा लेगा।
- ईरान 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित रास्ता देगा।
- ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर का प्लान बनाया गया है।
- ईरान ने भरोसा दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जैसा ही रखेगा।
इसराइल की जिद और तनाव
इस समझौते के बावजूद इसराइल का रुख सख्त है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने 18 जून 2026 को ऐलान किया कि जब तक उत्तरी इसराइल की सुरक्षा पूरी तरह बहाल नहीं हो जाती, तब तक IDF अपनी सेना को दक्षिणी लेबनान के सुरक्षा पट्टी से नहीं हटाएगी। इसराइल ने एक नक्शा भी जारी किया है जिसमें उसकी सैन्य पोजीशन दिखाई गई है।
इसराइल के अधिकारी अमेरिका के साथ बातचीत तो कर रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि वे अपनी सुरक्षा जरूरतों से समझौता नहीं करेंगे। वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय ने चेतावनी दी है कि अगर इसराइल की सेना लेबनान में रही, तो यह पूरा समझौता रद्द कर दिया जाएगा।
अमेरिका का रुख और ताजा हालात
अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस समझौते का बचाव किया और इसराइल को आगाह किया कि केवल सैन्य हमलों से सुरक्षा की समस्या हल नहीं की जा सकती। अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर लगी नाकाबंदी हटा ली है, लेकिन अमेरिकी रिपब्लिकन पार्टी के कुछ नेताओं ने इस डील की आलोचना की है और इसे एक बड़ी गलती बताया है।
मैदान पर हालात अब भी खराब हैं। 18 जून 2026 को इसराइल ने दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम तीन लोग मारे गए। हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उन्होंने इसराइल की एक बड़ी наступ (offensive) को नाकाम कर दिया है। इन घटनाओं की वजह से लेबनान के लोग इस बात को लेकर शक में हैं कि क्या वाकई में युद्ध खत्म होगा।