अमेरिका और ईरान के बीच हाल ही में हुए एक समझौते (MoU) ने नई बहस छेड़ दी है। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने इस डील की कड़ी आलोचना की है। उनका कहना है कि यह समझौता अमेरिका के बजाय ईरान के लिए ज्यादा फायदेमंद है और इससे डोनाल्ड ट्रंप मुश्किल स्थिति में पड़ सकते हैं।

Strait of Hormuz पर बड़ी चिंता

जॉन बोल्टन का मानना है कि इस समझौते में वही गलतियां दोहराई गई हैं जो पहले के परमाणु समझौतों में हुई थीं। सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) को लेकर है। यह रास्ता तेल के व्यापार के लिए दुनिया भर में बहुत जरूरी है। बोल्टन के मुताबिक, यह डील इस बात की गारंटी नहीं देती कि ईरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल नहीं वसूलेगा या कोई शर्त नहीं लगाएगा।

युद्ध के बाद बातचीत का दौर

आपको बता दें कि फरवरी 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हुआ था, जिसके बाद अप्रैल 2026 में युद्धविराम (ceasefire) हुआ। इसके बाद बातचीत शुरू हुई और मई 2026 में ट्रंप प्रशासन ने ईरान के 14 सूत्री प्रस्ताव की समीक्षा की। 18 जून 2026 से दोनों देशों के बीच 60 दिनों की बातचीत की समय सीमा आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है।

उपराष्ट्रपति JD Vance का दावा

दूसरी तरफ, अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस शांति समझौते को सकारात्मक बताया है। उन्होंने दावा किया कि ईरान का परमाणु हथियार कार्यक्रम अब पूरी तरह खत्म हो चुका है और उनकी मिसाइल लॉन्चर भी तबाह हो गए हैं। उन्होंने यह भी बताया कि राष्ट्रपति के शांति प्लान की वजह से Strait of Hormuz से 12.5 मिलियन बैरल तेल गुजरा, जो संघर्ष की शुरुआत के बाद सबसे ज्यादा है।

ट्रंप की मुश्किल स्थिति

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समय एक कठिन स्थिति में हैं। वह चाहते हैं कि तेल की कीमतें कम रहें ताकि बाजार में सुधार हो और स्टॉक मार्केट ऊपर जाए। इसी वजह से उन पर दबाव है कि वह तेल की सप्लाई सुचारू रखने के लिए ईरान को कुछ रियायतें दें, जिसे जॉन बोल्टन गलत मान रहे हैं।

Sushma Kumari

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