लेबनान में जारी जंग को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता हुआ है। ईरान के संसद स्पीकर ने जानकारी दी है कि एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MOU) के जरिए युद्ध रोकने की सहमति बनी है। इस समझौते के बाद अब लेबनान में शांति बहाल होने की उम्मीद जगी है।

📰: Israil का बड़ा ऐलान, Hezbollah का खात्मा ज़रूरी, लेबनान के साथ बातचीत के बाद सामने आई बड़ी शर्तें

इस पूरे मामले की शुरुआत 14 जून 2026 को हुई, जब पाकिस्तान ने मध्यस्थ बनकर अमेरिका और ईरान के बीच इस MOU को फाइनल किया। 15 जून को ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबाबदी ने सरकारी टीवी पर इसकी पुष्टि की। लेबनान के संसद स्पीकर नबीह बेरी और सऊदी अरब ने भी इस कदम का स्वागत किया।

17 जून 2026 को अमेरिका और ईरान ने इस समझौते पर डिजिटल तरीके से हस्ताक्षर किए। अमेरिकी अधिकारियों द्वारा जारी इस दस्तावेज में साफ़ लिखा है कि लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी तौर पर बंद किए जाएंगे। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने 18 जून को बताया कि 14 जून की शाम से ही सभी सैन्य ऑपरेशन बंद कर दिए गए थे।

ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने 24 जून को कहा कि इस समझौते के साथ अमेरिका यह युद्ध हार गया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लेबनान को इस समझौते में शामिल करना ईरान की प्राथमिकता थी। 29 जून को अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी बातचीत भी हुई ताकि समझौते के सभी पहलुओं को लागू किया जा सके।

हालांकि, हालिया अपडेट्स में कुछ मतभेद भी सामने आए हैं। 30 जून 2026 को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने दक्षिणी लेबनान के दौरे के दौरान कहा कि जब तक हिजबुल्लाह खतरा बना रहेगा, उनकी सेना वहां तैनात रहेगी। वहीं, लेबनान के स्पीकर नबीह बेरी ने अमेरिका द्वारा लेबनान और इजरायल के बीच बनाए गए एक अलग फ्रेमवर्क समझौते को साजिश करार दिया है। ईरान के टॉप डिप्लोमेट ने 30 जून को दोबारा कहा कि समझौते के तहत इजरायल को लेबनान से हटना होगा, लेकिन इजरायल ने इस शर्त को मानने से इनकार कर दिया है।