अमेरिका और ईरान के बीच एक नया समझौता हुआ है जिससे पूरे मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद जगी है। US Secretary of State Marco Rubio अब खाड़ी देशों के दौरों पर हैं ताकि वहां के सहयोगियों को सुरक्षा का भरोसा दिलाया जा सके। इस समझौते के तहत लेबनान में युद्धविराम और व्यापारिक रास्तों को खोलने पर बात हुई है।
क्या है अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता
17 जून 2026 को फ्रांस और ईरान में एक समझौता (MOU) साइन किया गया। इस डील के मुताबिक 60 दिनों का युद्धविराम (ceasefire) लागू होगा और Strait of Hormuz को दोबारा खोला जाएगा। इस समझौते की बारीकियों को तय करने के लिए 21 जून को स्विट्जरलैंड में ‘Lake Lucerne Summit’ नाम की हाई-लेवल मीटिंग शुरू हुई।
समझौते के बाद अमेरिका ने 22 जून को ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को अस्थायी तौर पर हटा लिया। यह छूट 21 अगस्त तक रहेगी, जिससे ईरान अपने तेल का उत्पादन और बिक्री कर सकेगा। इसके साथ ही परमाणु मुद्दों और प्रतिबंधों पर काम करने के लिए अलग-अलग वर्किंग ग्रुप बनाने का फैसला लिया गया है।
खाड़ी देशों का दौरा और सुरक्षा की चिंता
23 जून को Secretary of State Marco Rubio ने UAE, Kuwait और Bahrain की यात्रा शुरू की। इस दौरे का मकसद Gulf देशों को यह भरोसा दिलाना है कि अमेरिका उनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। कुछ देशों को डर था कि इस समझौते से ईरान और ज़्यादा ताकतवर हो सकता है, जिसे दूर करने के लिए यह बातचीत की जा रही है।
बड़े नेताओं के बयान और शर्तें
- Vice President JD Vance: उन्होंने बताया कि ईरान ने IAEA के निरीक्षकों को वापस आने की अनुमति दे दी है। साथ ही, Qatar की मदद से ईरान की जमी हुई संपत्ति को खोलने की प्रक्रिया शुरू होगी, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अमेरिकी खेती के सामान खरीदने के लिए किया जाएगा।
- President Donald Trump: ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी है कि लेबनान में उनके प्रॉक्सी (Hezbollah) अपनी हरकतें तुरंत बंद करें, वरना सैन्य कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने यह भी दावा किया कि ईरान परमाणु हथियारों की जांच के लिए तैयार हो गया है, हालांकि ईरान ने इस बात से इनकार किया है।
- ईरानी अधिकारी: ईरान के संसद स्पीकर Mohammad-Bagher Ghalibaf और विदेश मंत्री Abbas Araghchi इन बातचीत में शामिल हैं। ईरान का कहना है कि Strait of Hormuz का प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय कानून के हिसाब से ईरान ही करेगा।
प्रॉक्सी और लेबनान पर असर
इस समझौते में लेबनान में ceasefire की बात कही गई है, जिससे Hezbollah की गतिविधियों पर लगाम लग सकती है। MOU में यह भी लिखा है कि अमेरिका और Israel भविष्य में ईरान या उसके प्रॉक्सी देशों के खिलाफ कोई नया युद्ध या सैन्य ऑपरेशन शुरू नहीं करेंगे और न ही बल प्रयोग की धमकी देंगे।
