अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता (MoU) हुआ है जिससे दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है। इस डील में युद्ध रोकने और व्यापारिक रास्ते खोलने की बात कही गई है। हालांकि, मिडिल ईस्ट फोरम के माइकल रुबिन ने इस फैसले की कड़ी आलोचना की है और इसे आने वाले समय में और ज़्यादा लड़ाई का कारण बताया है।

क्या है यह समझौता और इसकी शर्तें

इस MoU के तहत अमेरिका और ईरान भविष्य में बातचीत के लिए एक ढांचा तैयार करेंगे। अमेरिका ने कहा है कि वह ईरान पर लगे प्रतिबंध तभी हटाएगा जब ईरान परमाणु जांच में सहयोग करेगा और आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देगा। इस समझौते में लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने की बात कही गई है। साथ ही, Strait of Hormuz को दोबारा खोलने और ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने का भी फैसला लिया गया है।

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि यह दस्तावेज़ करीब 1.5 पेज का है और काफी सामान्य है। परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक बातचीत होगी। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इस समझौते का पूरा टेक्स्ट अगले 24 से 48 घंटों में जारी कर दिया जाएगा।

पैसों को लेकर विवाद और ईरान की मांगें

समझौते में पैसों के लेन-देन को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच मतभेद दिख रहे हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड का दावा है कि उन्हें बातचीत खत्म होने से पहले अपने जमा किए गए 24 अरब डॉलर में से आधे पैसे मिल जाएंगे। वहीं, अमेरिका ने इस बात से इनकार किया है और कहा है कि पैसे तभी मिलेंगे जब ईरान शर्तों को पूरा करेगा।

ईरान ने कुछ बड़ी मांगें रखी हैं जिनमें स्थायी युद्धविराम, 30 दिनों के भीतर नौसैनिक नाकाबंदी हटाना और 300 अरब डॉलर का आर्थिक पैकेज शामिल है। ईरान ने यह भी साफ कर दिया है कि वह अपने मिसाइल प्रोग्राम और क्षेत्रीय समूहों को दिए जाने वाले समर्थन पर कोई बात नहीं करेगा।

पाकिस्तान की भूमिका और आलोचना

इस शांति समझौते को करवाने में पाकिस्तान और कतर ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस डील की घोषणा की और अमेरिका व ईरान का शुक्रिया अदा किया। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और कई देशों के नेताओं ने पाकिस्तान के इस प्रयास की तारीफ की है।

दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट फोरम के माइकल रुबिन ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि यह डील ईरान को और ताकत देगी और इससे मिडिल ईस्ट में फिर से टकराव शुरू हो सकता है। रुबिन ने पाकिस्तान को मध्यस्थ बनाने के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में गलत निर्णय ले चुके हैं।

इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा में होने की उम्मीद है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com