अमेरिका और ईरान ने मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए एक ऐतिहासिक समझौते (MOU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस डील को करवाने में कतर और पाकिस्तान ने बहुत बड़ी भूमिका निभाई है। 17 जून 2026 को हुए इस समझौते के बाद अब क्षेत्र में शांति लौटने की उम्मीद जगी है और इसका असर दुनिया भर के तेल बाजार पर दिखने लगा है।

कैसे और कहाँ हुआ यह समझौता

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने फ्रांस के Palace of Versailles में इस दस्तावेज़ पर साइन किए। वहीं, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने तेहरान में इस पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता 18 जून 2026 से लागू हो गया है। इस पूरी प्रक्रिया में सऊदी अरब, तुर्की और मिस्र जैसे देशों ने भी मदद की। अमेरिका की तरफ से उपराष्ट्रपति JD Vance और विदेश मंत्री Marco Rubio भी इस चर्चा में शामिल थे।

समझौते की मुख्य शर्तें

  • लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और हमेशा के लिए रोका जाएगा।
  • Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा और ईरान के बंदरगाहों पर लगी अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटा ली जाएगी।
  • अमेरिका ने ईरान पर लगे तेल प्रतिबंधों को तुरंत हटाने का वादा किया है।
  • ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति बनने के बाद क्षेत्रीय देशों की मदद से 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड दिया जाएगा।
  • दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
  • परमाणु कार्यक्रम और अन्य मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिनों की बातचीत की प्रक्रिया शुरू होगी।

नेताओं और देशों की प्रतिक्रिया

राष्ट्रपति Donald Trump ने कहा कि उन्होंने साइन कर दिए हैं, लेकिन यह उनकी मंजूरी पर निर्भर है। उन्होंने यह भी कहा कि इस डील को रिव्यू के लिए अमेरिकी कांग्रेस के पास भेजा जाएगा। दूसरी ओर, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने इसे एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ बताया और कहा कि शांति आपसी सम्मान से आएगी।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने ऐलान किया कि यह समझौता तुरंत प्रभाव से लागू होगा। कतर के विदेश मंत्रालय ने दोनों पक्षों के प्रयासों की सराहना की और उम्मीद जताई कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा बढ़ेगी। हालांकि, इसराइल के अधिकारियों और प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इस डील पर गहरी चिंता जताई है।

आम जनता और बाजार पर असर

इस समझौते का असर तुरंत देखने को मिला। साइन होने के कुछ ही घंटों बाद सऊदी अरब के तीन बड़े तेल टैंकर 60 लाख बैरल कच्चा तेल लेकर Strait of Hormuz से सफलतापूर्वक गुजरे। बाजार में Brent crude की कीमतें 2 प्रतिशत गिरकर 78 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गईं, जो युद्ध शुरू होने के बाद का सबसे निचला स्तर है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि युद्ध के 100 दिनों में पहली बार ईरान ने किसी जहाज पर हमला नहीं किया।

अब कतर के दोहा में दोनों देशों के बीच तैयारी बैठकें होंगी, जिसके बाद स्विट्जरलैंड में औपचारिक साइनिंग और तकनीकी बातचीत शुरू होगी।