अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक नए समझौते की कोशिशें तेज हो गई हैं। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने बताया कि दोनों देश एक सहमति पत्र यानी MoU को अंतिम रूप देने पर काम कर रहे हैं। पिछले एक हफ्ते के दौरान दोनों पक्षों के विचार एक-दूसरे के करीब आए हैं। हालांकि, अभी भी कुछ मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं और दोनों देशों के बीच परोक्ष बातचीत का दौर जारी है।

समझौते में क्या-क्या है शामिल और क्या मिल सकती है राहत?

यह प्रस्तावित सहमति पत्र दोनों देशों के बीच बड़े स्तर की बातचीत का पहला कदम माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य मौजूदा संघर्ष विराम को मजबूत करना और हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही से जुड़े विवादों को सुलझाना है। नए अमेरिकी प्रस्ताव में ईरान को कुछ आर्थिक रियायतें देने की बात कही गई है, जिसमें तेल बिक्री पर छूट और फ्रीज किए गए पैसों को धीरे-धीरे वापस करना शामिल है। इसके बदले में ईरान को अपनी सैन्य कार्रवाइयां तुरंत रोकनी होंगी और परमाणु हथियार न बनाने का वादा करना होगा।

बातचीत में कहां फंसा है पेंच और क्या है अमेरिका का प्लान?

ईरान और अमेरिका के बीच इस बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि कतर की एक टीम भी तेहरान में मौजूद है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने बातचीत में थोड़ी प्रगति की बात स्वीकार की है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में टैक्स सिस्टम बनाने की ईरान की कोशिश मंजूर नहीं है। वहीं, ईरान का कहना है कि इस जलमार्ग से अमेरिका का कोई लेना-देना नहीं है और इस पर फैसला केवल सीमा साझा करने वाले देश ही करेंगे। इसके साथ ही, यदि बातचीत विफल होती है, तो ट्रंप प्रशासन ने ईरान के ऊर्जा ठिकानों पर सैन्य हमलों की तैयारी भी कर रखी है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

ईरान और अमेरिका के बीच चल रही बातचीत में कौन से देश मध्यस्थ हैं?

इस परोक्ष बातचीत में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है, जबकि कतर की टीम भी तेहरान में बातचीत के लिए सक्रिय है।

अमेरिका के इस नए समझौते के प्रस्ताव में ईरान के लिए क्या शर्तें और राहत हैं?

प्रस्ताव के तहत ईरान को आर्थिक रियायतें और तेल बिक्री में छूट मिल सकती है, जिसके बदले ईरान को अपनी सैन्य कार्रवाइयां रोकनी होंगी और परमाणु हथियार न बनाने का संकल्प लेना होगा।