अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागर कालिबाफ ने इस समझौते (MOU) पर डिजिटल हस्ताक्षर कर दिए हैं। इस खबर के बाद दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है और दोनों देशों के बीच तनाव कम होने की संभावना है।
समझौते की मुख्य बातें
- नेवल नाकाबंदी: अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी नेवल नाकाबंदी को हटाने का फैसला किया है। यह प्रक्रिया 30 दिनों के भीतर पूरी हो जाएगी।
- Strait of Hormuz: राष्ट्रपति ट्रंप ने ऐलान किया है कि इस समुद्री रास्ते को अब टोल फ्री रखा जाएगा ताकि जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट के हो सके।
- युद्ध विराम: लेबनान में इसराइल और हिजबुल्लाह के बीच चल रही लड़ाई समेत सभी मोर्चों पर तुरंत और स्थायी युद्ध विराम लागू होगा।
- 60 दिनों की बातचीत: यह एक शुरुआती समझौता है। अगले 60 दिनों तक दोनों देश ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिकी प्रतिबंधों पर बातचीत करेंगे ताकि एक फाइनल डील तैयार की जा सके।
- तेल और केमिकल्स: ईरान के तेल और पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर लगे प्रतिबंधों को रोकने की बात हुई है, जिससे ईरान को अपनी कमाई फिर से शुरू करने में मदद मिलेगी।
आगे क्या होगा
इस डिजिटल हस्ताक्षर के बाद अब 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड में एक औपचारिक कार्यक्रम होगा, जहाँ इस समझौते पर आधिकारिक तौर पर साइन किए जाएंगे। इस पूरी डील को करवाने में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और कतर ने मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई है।
पैसों और शर्तों पर विवाद
पैसे के लेन-देन को लेकर अभी भी कुछ मतभेद हैं। ईरान की Revolutionary Guard (IRGC) का दावा है कि उन्हें करीब 24 अरब डॉलर में से आधा पैसा वापस मिलेगा। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया है कि जब तक ईरान शर्तों को पूरा नहीं करता, तब तक कोई फंड जारी नहीं किया जाएगा।
अमेरिका ने यह भी भरोसा दिलाया है कि वह ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा और उसकी संप्रभुता का पूरा सम्मान करेगा। वहीं ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा।