अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। दोनों देश 19 जून को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर करेंगे। इस कदम से दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है और युद्ध रोकने की बात चल रही है।

इस MoU में कई अहम बातें शामिल हैं। इसके तहत लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत बंद किए जाएंगे। साथ ही, Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा और ईरान पर लगी नौसेना की पाबंदी हटाई जाएगी। ईरान ने यह भरोसा भी दिलाया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

हालांकि, अंतिम समझौते को लेकर दोनों देशों की बातों में थोड़ा अंतर दिख रहा है। एक तरफ खबर आई कि अंतिम बातचीत MoU वाले दिन ही होगी, लेकिन ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araqchi और डिप्टी विदेश मंत्री का कहना है कि यह सिर्फ पहला चरण है। उन्होंने बताया कि MoU के बाद 60 दिनों का समय मिलेगा, जिसमें विवादित मुद्दों और परमाणु फाइल पर चर्चा होगी। अगर इस समय में वादे पूरे नहीं हुए, तो अंतिम समझौते की बात आगे नहीं बढ़ेगी।

अमेरिका के अधिकारियों ने भी इसे सिर्फ पहला कदम बताया है। उन्होंने कहा कि असली तकनीकी चर्चाएं बाद में शुरू होंगी। इस पूरे समझौते को करवाने में पाकिस्तान और कतर ने अहम भूमिका निभाई है। इसके अलावा सऊदी अरब और मिस्र ने भी इस कोशिश में मदद की है।

लेबनान के संसद अध्यक्ष Nabih Berri ने भी इस समझौते की तारीफ की है। उन्होंने खास तौर पर उस हिस्से का स्वागत किया है जिसमें लेबनान पर इजरायली हमले रोकने की बात कही गई है।