अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए स्विट्जरलैंड के Bürgenstock में अहम बातचीत चल रही है. दोनों देशों ने एक समझौते (MoU) पर दस्तखत किए हैं ताकि दुनिया में शांति बनी रहे. लेकिन इस बीच ईरान ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद कर दिया है, जिससे माहौल फिर गरमा गया है.
यह समझौता 17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और ईरानी राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian के बीच इलेक्ट्रॉनिक तरीके से साइन हुआ था. इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. इस 14 पॉइंट्स वाले समझौते का मुख्य मकसद युद्ध को खत्म करना है, जिसके लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है.
स्विट्जरलैंड की सरकार ने शनिवार को पुष्टि की कि Bürgenstock में डिप्लोमैटिक बातचीत जारी है. हालांकि, 19 जून को होने वाली सीनियर लेवल की मीटिंग को टाल दिया गया. ईरान का कहना है कि लेबनान में इसराइल की सैन्य कार्रवाई जारी है, जो नए समझौते का उल्लंघन है. अब 21 जून से तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होने की उम्मीद है, जिसमें कतर और पाकिस्तान के प्रतिनिधि भी शामिल रहेंगे.
तनाव तब और बढ़ गया जब ईरान की IRGC ने शनिवार, 20 जून 2026 को Strait of Hormuz को सभी जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया. ईरान ने इसका कारण इसराइल के हमले और अमेरिका द्वारा समझौते का पालन न करना बताया है. ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmail Bagahei ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने अपनी प्रतिबद्धता नहीं दिखाई, तो यह पूरा समझौता खतरे में पड़ सकता है.
इस समझौते में कई बड़ी शर्तें शामिल की गई हैं, जिन्हें नीचे टेबल में देखा जा सकता है:
| शर्त/प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| युद्धविराम | दोनों पक्षों के बीच व्यापक युद्धविराम लागू होगा |
| प्रतिबंध और संपत्ति | ईरान पर से प्रतिबंध हटेंगे और उसकी जमी हुई संपत्ति वापस मिलेगी |
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और IAEA उसकी निगरानी करेगा |
| नौसैनिक नाकेबंदी | अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और ईरान जहाजों का रास्ता साफ रखेगा |
| आर्थिक मदद | ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर की मदद का प्रस्ताव है |
बातचीत में अमेरिका की तरफ से Jared Kushner और Special Envoy Steve Witkoff स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं. कतर के प्रधानमंत्री Mohammed bin Abdulrahman Al Thani और स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्री Ignazio Cassis ने भी शांति के लिए अपनी कोशिशें जारी रखी हैं. संयुक्त राष्ट्र (UN) के प्रमुख António Guterres ने इस समझौते को विवाद सुलझाने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया है.