अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े समझौते (MoU) पर दस्तखत हुए हैं. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब उम्मीद जताई है कि लेबनान, हिजबुल्लाह और इसराइल समेत सभी मोर्चों पर युद्ध पूरी तरह रुक जाएगा. इस समझौते के बाद मिडिल ईस्ट में शांति की नई उम्मीद जागी है.

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यह 14 पॉइंट का समझौता 17 जून 2026 को हुआ था. इस डील के तहत अमेरिका ने ईरान पर लगी अपनी नौसैनिक पाबंदी (blockade) को हटाने का फैसला किया है. जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया है. साथ ही, अमेरिका ईरान के विकास और पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर की मदद देगा.

इस समझौते की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और अपने परमाणु कार्यक्रम को मौजूदा स्थिति पर रखेगा.
  • अमेरिका ईरान के बंदरगाहों से नाकेबंदी को 30 दिनों के भीतर पूरी तरह हटा लेगा.
  • दोनों देशों के बीच अंतिम और व्यापक समझौते के लिए 60 दिन की बातचीत तय की गई है.
  • अमेरिका इस दौरान ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा.

दूसरी तरफ, इसराइल ने इस समझौते से खुद को अलग रखा है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि इसराइल इस डील से बंधा नहीं है. इसराइली सेना लेबनान के दक्षिणी हिस्से से अपनी फौज पीछे नहीं हटाएगी और हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य ऑपरेशन जारी रखेगी. खबर है कि इसराइली सेना लेबनान के इलाके में करीब 10 किलोमीटर अंदर तक दाखिल हो चुकी है.

जमीनी हालात की बात करें तो समझौता होने के बावजूद लेबनान में हमले जारी रहे. लेबनानी मीडिया के मुताबिक, इसराइल के हवाई हमलों में तीन लोगों की मौत हुई है. वहीं, US सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के बंदरगाहों से नाकेबंदी हटाने का ऐलान कर दिया है, जिससे अब जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू हो गई है.

इस समझौते का असर आर्थिक मोर्चे पर भी दिखा है. ईरान की करेंसी ‘रियाल’ की कीमत अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 15% से ज्यादा बढ़ गई है और वहां का शेयर बाजार भी ऊपर गया है. कुवैत ने भी क्षेत्रीय संघर्ष के दौरान लगाए गए सभी ‘फोर्स मेज्योर’ नोटिस हटा लिए हैं.

हालांकि, अमेरिका के भीतर इस फैसले का विरोध भी हो रहा है. सीनेटर बिल कैसिडी ने इसे दशकों की सबसे बड़ी विदेशी नीति की गलती बताया है. वहीं रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने अपनी शर्तों को पूरा नहीं किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई और नाकेबंदी शुरू कर देगा.