अमेरिका ने ईरान के सभी समुद्री बंदरगाहों की नाकेबंदी कर दी है। हालांकि बाजार में तेल की कीमतों में हल्की गिरावट देखी गई है, लेकिन जानकारों का कहना है कि यह सिर्फ ऊपरी तौर पर है। असल में सप्लाई चेन में बड़ी दिक्कतें आने वाली हैं जिससे आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है।

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर क्या पाबंदी लगाई है?

राष्ट्रपति Donald Trump ने 13 अप्रैल को ईरान के सभी बंदरगाहों की naval blockade शुरू की थी। US Central Command ने बताया कि 36 घंटों के भीतर इस पाबंदी को पूरी तरह लागू कर दिया गया। अमेरिकी जहाजों ने ईरान से बाहर जाने वाले तेल टैंकरों को रोका और उन्हें वापस जाने का आदेश दिया। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ युद्ध अब खत्म होने के करीब है और वे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

क्या तेल और खाद की कीमतें कम होंगी?

International Monetary Fund (IMF), IEA और World Bank ने एक साथ चेतावनी जारी की है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर ऊर्जा और खाद की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहेंगी। मिडिल ईस्ट के इस संघर्ष ने ग्लोबल सप्लाई चेन को बहुत गहरा नुकसान पहुंचाया है। इन संस्थाओं का मानना है कि अगर Strait of Hormuz फिर से पूरी तरह खुल भी जाता है, तब भी कीमतें तुरंत कम नहीं होंगी क्योंकि समस्या संरचनात्मक है।

ईरान और अन्य देशों की क्या प्रतिक्रिया है?

  • ईरान: मोहम्मद मोखबर ने चेतावनी दी कि वे नए मोर्चों पर दबाव बढ़ाएंगे और हूतियों के जरिए Bab al Mandeb जलडमरूमध्य को बंद करवा सकते हैं।
  • रूस: विदेश मंत्री लावरोव ने कहा कि वे चीन की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकते हैं।
  • चीन: अमेरिका द्वारा नए टैरिफ लगाए जाने पर जवाबी कार्रवाई करने की बात कही है।
  • UN: महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने अंतरराष्ट्रीय कानून के हनन पर चिंता जताई और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की।