अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब एक नए स्तर पर पहुँच गया है। US ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री घेराबंदी कर दी है, जिससे वहां का व्यापार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ईरान के राष्ट्रपति ने इसे सीधा हमला बताया है, जबकि अमेरिका का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों की सुरक्षा के लिए उठाया गया है।

अमेरिका की घेराबंदी और तेल व्यापार पर असर

US Central Command (CENTCOM) ने 30 अप्रैल 2026 को 44 कमर्शियल जहाजों को रास्ता बदलने या वापस लौटने का आदेश दिया। अरब सागर में USS New Orleans जहाज पर तैनात US Marines इस ऑपरेशन को चला रहे हैं। CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बताया कि इस कार्रवाई से ईरान के तेल व्यापार में भारी गिरावट आई है।

वर्तमान स्थिति का विवरण नीचे दी गई टेबल में है:

विवरण आंकड़े
रोके गए तेल टैंकर 41
तेल की कुल मात्रा 69 मिलियन बैरल
तेल का अनुमानित मूल्य 6 अरब डॉलर से ज्यादा
वापस मोड़े गए जहाज 44

ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने अमेरिकी कार्रवाई की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह घेराबंदी सैन्य ऑपरेशन्स का ही एक हिस्सा है और यह पूरी तरह नाकाम होगी। उन्होंने यह भी कहा कि फारस की खाड़ी विदेशी ताकतों के हस्तक्षेप का जरिया नहीं बननी चाहिए। ईरान की सेना ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने उनके जहाजों को पकड़ना जारी रखा, तो वे कड़ी सैन्य कार्रवाई करेंगे।

दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रणनीति को जीनियस और पूरी तरह कामयाब बताया। ट्रंप का कहना है कि इस दबाव से ईरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाएं छोड़ देगा। अमेरिका के युद्ध सचिव पीट हेगसेथ ने साफ किया कि इस सैन्य कार्रवाई को जारी रखने के लिए उन्हें कांग्रेस की अनुमति की जरूरत नहीं है।

शिपिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

यह समुद्री घेराबंदी 13 अप्रैल 2026 को शुरू हुई थी। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अभी दोनों देशों की नौसेनाएं आमने-सामने हैं, जिससे जहाजों की आवाजाही लगभग बंद हो गई है। संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने सभी देशों से अपील की है कि वे सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 2817 का पालन करें और जहाजों के आने-जाने का रास्ता तुरंत बहाल करें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की घेराबंदी क्यों की?

अमेरिका का कहना है कि यह एक रक्षात्मक कदम है ताकि अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में जहाजों की आवाजाही सुरक्षित रहे और ईरान को उसकी आक्रामक हरकतों के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सके।

इस घेराबंदी से ईरान को कितना आर्थिक नुकसान हुआ है?

एडमिरल ब्रैड कूपर के अनुसार, 41 टैंकरों में करीब 69 मिलियन बैरल तेल फंसा हुआ है, जिसकी कीमत 6 अरब डॉलर से अधिक है और ईरान इसे बेच नहीं पा रहा है।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.