अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत अब एक मुश्किल मोड़ पर आ गई है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने साफ़ कहा है कि अमेरिका पर भरोसा नहीं है, जिसकी वजह से शांति की राह कठिन हो गई है। अब ईरान चीन की तरफ देख रहा है, जबकि पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अमेरिका ने बड़े सवाल उठाए हैं।
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ईरान और अमेरिका के बीच क्यों नहीं बन रही बात और चीन का क्या रोल है?
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने 15 मई 2026 को नई दिल्ली में बातचीत के दौरान बताया कि वाशिंगटन के साथ बातचीत तभी संभव है जब अमेरिका गंभीर हो। उन्होंने साफ़ किया कि दोनों देशों के बीच भरोसा न होना सबसे बड़ी रुकावट है। अब ईरान चाहता है कि China इस मामले में मध्यस्थ बने क्योंकि चीन के साथ उनके संबंध अच्छे हैं और चीन की नीयत सकारात्मक है।
पाकिस्तान की मध्यस्थता पर अमेरिका ने क्या आरोप लगाए?
अमेरिकी सीनेटर Lindsey Graham ने पाकिस्तान की विश्वसनीयता पर बड़ा हमला किया है। उन्होंने 12 मई 2026 को कहा कि उन्हें पाकिस्तान पर बिल्कुल भरोसा नहीं है। आरोप लगाया गया है कि पाकिस्तान अपने एयरबेस पर ईरानी सैन्य विमानों को जगह दे रहा है ताकि ईरान की सैन्य संपत्ति सुरक्षित रहे। इस वजह से अमेरिका का मानना है कि अब किसी दूसरे मध्यस्थ को ढूंढने का समय आ गया है।
Strait of Hormuz और तेल की सप्लाई पर क्या हुआ समझौता?
15 मई 2026 को राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बीजिंग में मीटिंग हुई। दोनों नेताओं ने सहमति जताई कि Strait of Hormuz को हर हाल में खुला रखना होगा ताकि ग्लोबल तेल सप्लाई प्रभावित न हो। इसके साथ ही यह बात तय हुई कि ईरान को कभी परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। ट्रंप ने यह भी बताया कि शी जिनपिंग ने ईरान को कोई सैन्य उपकरण न देने का वादा किया है। 14 मई 2026 को यह भी खबर आई कि चीनी जहाज अब ईरान के मैनेजमेंट प्रोटोकॉल के तहत इस जलमार्ग से गुजर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Strait of Hormuz इतना ज़रूरी क्यों है?
यह दुनिया के लिए तेल सप्लाई का सबसे मुख्य रास्ता है। अगर यह बंद होता है तो पूरी दुनिया में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। चीन ईरान का सबसे बड़ा तेल खरीदार है, इसलिए वह इसे खुला रखना चाहता है।
ईरान ने अमेरिका के बारे में क्या कहा?
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरगची ने कहा कि अमेरिका के साथ ‘मिस्ट्रस्ट’ यानी भरोसे की कमी ही शांति की राह में सबसे बड़ी बाधा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान तभी बातचीत करेगा जब अमेरिका का व्यवहार बदलेगा।
