अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत अब एक बहुत ही अहम मोड़ पर पहुंच गई है. पाकिस्तान इस पूरे मामले में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है और आने वाले कुछ दिन दोनों देशों के लिए बहुत निर्णायक होंगे. फिलहाल ईरान अमेरिका की प्रतिक्रिया का इंतज़ार कर रहा है ताकि चल रहे तनाव और युद्ध को खत्म करने का रास्ता निकाला जा सके.

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ईरान ने अमेरिका के सामने क्या शर्तें रखी हैं?

ईरान ने अपनी बात रखने के लिए एक 14 सूत्रीय प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे पाकिस्तान के ज़रिए अमेरिका तक पहुँचाया गया है. इस प्रस्ताव की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:

  • अगले 30 दिनों के भीतर युद्ध को पूरी तरह खत्म किया जाए.
  • अमेरिका ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटा ले.
  • अमेरिकी नौसेना द्वारा लगाई गई नाकेबंदी को खत्म किया जाए.
  • क्षेत्र से अमेरिकी सेनाओं को वापस बुलाया जाए.
  • लेबनान में इजरायली सैन्य अभियानों समेत सभी तरह की लड़ाई बंद हो.
  • ईरान ने यूरेनियम संवर्धन को 3.5 प्रतिशत तक सीमित करने और अपने स्टॉक को धीरे-धीरे कम करने की बात भी कही है.

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump का क्या रुख है?

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान के इस नए प्रस्ताव पर संदेह जताया है. उन्होंने साफ़ कहा कि वह इस प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं और उनका मानना है कि ईरान ने अपनी गलतियों की अभी तक कोई बड़ी कीमत नहीं चुकाई है. Trump ने चेतावनी दी है कि अगर तेहरान ने गलत व्यवहार किया, तो अमेरिका फिर से सैन्य हमले कर सकता है. वहीं अमेरिकी ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने कहा कि अमेरिका आर्थिक नाकेबंदी के ज़रिए ईरान के नेतृत्व का दम घोंट रहा है.

क्या फिर से युद्ध छिड़ने का खतरा है?

हालाँकि 8 अप्रैल 2026 से एक नाजुक युद्धविराम लागू है, लेकिन हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं. Strait of Hormuz के पास एक मालवाहक जहाज पर छोटे जहाजों द्वारा हमला किया गया है, जिससे डर बढ़ गया है. ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का कहना है कि अमेरिका के पास या तो एक नामुमकिन सैन्य ऑपरेशन का विकल्प है या फिर एक बुरा समझौता. ईरान के डिप्टी पार्लियामेंट स्पीकर Ali Nikzad ने साफ़ किया है कि ईरान Strait of Hormuz पर अपना रुख नहीं बदलेगा और युद्ध से पहले वाली स्थितियों पर वापस नहीं जाएगा.

Frequently Asked Questions (FAQs)

क्या ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता करने को तैयार है?

हाँ, Al Arabiya की रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने अपनी स्थिति नरम की है. वह अपने परमाणु कार्यक्रम को बातचीत में शामिल करने और यूरेनियम संवर्धन को 3.5 प्रतिशत तक सीमित करने पर सहमत हुआ है.

इस बातचीत में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच एकमात्र प्रभावी मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है. ईरान के राजदूत Reza Amiri Moghadam ने पुष्टि की है कि तेहरान का औपचारिक प्रस्ताव पाकिस्तान के ज़रिए ही भेजा गया है.

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.