अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम करने के लिए एक बार फिर बातचीत होने वाली है। स्विट्जरलैंड के Burgenstock में 28 और 29 जून को दोनों देश फिर से बैठेंगे। इस मुलाकात का मकसद पिछले दिनों बनी सहमति को आगे बढ़ाना और एक पक्के समझौते तक पहुँचना है।
इससे पहले 21-22 जून को दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय बैठक हुई थी, जिसे Lake Lucerne Summit के नाम से जाना गया। इस बैठक में अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के बड़े अधिकारी शामिल हुए थे। इस पूरी बातचीत में पाकिस्तान और कतर ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई।
दोनों देशों ने एक 60 दिनों का रोडमैप तैयार किया है ताकि एक व्यापक शांति समझौता हो सके। अब 28-29 जून को होने वाली बैठकें तकनीकी स्तर की होंगी, जिनमें समझौते की बारीकियों पर चर्चा की जाएगी।
परमाणु कार्यक्रम और निरीक्षण पर सहमति
इस बातचीत में एक बड़ी कामयाबी यह रही कि ईरान ने International Atomic Energy Agency (IAEA) के निरीक्षकों को वापस अपने देश बुलाने पर सहमति दे दी है। IAEA के डायरेक्टर जनरल Rafael Grossi ने 26 जून को पुष्टि की कि UN के परमाणु निरीक्षक ईरान जा सकेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि सिर्फ इरादा काफी नहीं है, बल्कि एक मजबूत वेरिफिकेशन सिस्टम का होना जरूरी है।
क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापारिक रास्ते
- Strait of Hormuz: यह तय हुआ है कि व्यापारिक जहाजों के लिए यह रास्ता खुला रहेगा। किसी भी गलतफहमी से बचने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच 60 दिनों के लिए एक सीधी बातचीत की लाइन शुरू की गई है।
- लेबनान मामला: लेबनान में युद्ध रोकने और सैन्य अभियानों को खत्म करने के लिए एक खास ‘डि-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाया गया है। इसमें अमेरिका, ईरान, लेबनान और मध्यस्थ देश शामिल होंगे।
प्रतिबंधों में मिली राहत
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने बताया कि इस समझौते के तहत ईरानी तेल और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दी गई है। US Treasury ने 21 अगस्त 2026 तक इन उत्पादों की बिक्री और डिलीवरी पर लगे प्रतिबंधों से छूट दे दी है और कुछ फ्रीज की गई संपत्ति भी वापस करने की बात कही है।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस प्रगति को एक अच्छी बुनियाद बताया है। वहीं ईरान के दूत Ali Bahreini ने प्रगति को तो स्वीकार किया, लेकिन अमेरिका पर भरोसा करने को लेकर सावधानी बरतने की बात कही है।
