ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए बड़ी हलचल शुरू हो गई है। अमेरिकी अधिकारी स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर शांति वार्ता के लिए स्विट्जरलैंड पहुंचे हैं। इस बैठक का मुख्य मकसद मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को खत्म करना और आपसी विवादों को सुलझाना है।
जानकारी के मुताबिक, स्पेशल एनवॉय स्टीव विटकॉफ शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के लिए रवाना हुए, जबकि राष्ट्रपति के दूत जेरेड कुशनर वहां पहले से मौजूद थे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के शनिवार, 20 जून 2026 को वहां पहुंचने की उम्मीद है। हालांकि, इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच हुई हिंसा की वजह से 19 जून को होने वाली बातचीत को टालना पड़ा था, लेकिन अब दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम होने के बाद बातचीत फिर से शुरू हो सकती है।
ये बातचीत एक हालिया समझौते (MoU) का हिस्सा है, जिसके तहत 60 दिनों तक चर्चा की जानी है। इस समझौते में कई अहम मुद्दे शामिल हैं:
- ईरान का परमाणु कार्यक्रम और उस पर चर्चा
- ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील देना
- ईरान की फ्रीज की गई संपत्तियों को वापस करना
- पुनर्निर्माण के लिए फंड की व्यवस्था
- स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का मैनेजमेंट
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई है कि मिडिल ईस्ट युद्ध को खत्म करने वाला यह समझौता जल्द ही साइन हो जाएगा। व्हाइट हाउस ने बताया कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी अंतिम समझौते पर साइन करने के लिए आने वाले थे, लेकिन हिंसा बढ़ने के कारण उनकी फ्लाइट कैंसिल हो गई। दूसरी तरफ, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख मोहम्मद बिन अब्दुल रहमान बिन जसीम अल थानी ने अमेरिका और ईरान के बीच इस बातचीत का पूरा समर्थन किया है।
ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि लेबनान में हालात कैसे रहते हैं, इसी पर बातचीत का भविष्य टिका है और वह चाहते हैं कि बातचीत से पहले लेबनान में युद्धविराम पूरी तरह लागू हो। वहीं, ईरानी संसद की नेशनल सिक्योरिटी कमेटी के प्रमुख इब्राहिम अजीजी ने वाशिंगटन पर आरोप लगाया कि अमेरिका शुरुआती समझौते में तय युद्धविराम की शर्तों का पालन नहीं कर रहा है।