अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर एक बड़ी खबर आई है। स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद दोनों देश 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौते पर पहुंचने के लिए तैयार हो गए हैं। इस खबर के आते ही दुनिया भर के बाजारों में हलचल मच गई और तेल की कीमतों में करीब 8 फीसदी की गिरावट देखी गई।
60 दिनों का रोडमैप और नई कमेटी
स्विट्जरलैंड के Bürgenstock रिसॉर्ट में हुई इस बैठक को Lake Lucerne Summit कहा गया, जो सोमवार 22 जून 2026 को खत्म हुई। दोनों देशों ने तय किया है कि अगले 60 दिनों के भीतर परमाणु समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया पर नज़र रखने के लिए एक High-Level Committee बनाई गई है, जो राजनीतिक निगरानी करेगी।
इस बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए खास वर्किंग ग्रुप बनाए गए हैं। अमेरिका की तरफ से JD Vance और ईरान की तरफ से Mohammad Bagher Ghalibaf इन ग्रुप्स का नेतृत्व करेंगे। ये ग्रुप परमाणु मुद्दों, प्रतिबंधों (sanctions) और विवादों को सुलझाने के तरीकों पर काम करेंगे।
सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव पर समझौता
सिर्फ परमाणु मुद्दा ही नहीं, बल्कि अन्य क्षेत्रीय विवादों को कम करने पर भी बात हुई है।
- Strait of Hormuz: समुद्री जहाजों की सुरक्षित आवाजाही के लिए दोनों पक्षों के बीच एक कम्युनिकेशन लाइन शुरू की गई है।
- Lebanon: लेबनान में सैन्य अभियान खत्म करने और शांति बनाए रखने के लिए एक de-confliction cell बनाने पर सहमति बनी है। इसमें लेबनान सरकार और मध्यस्थ देश भी शामिल होंगे।
नेताओं ने क्या कहा
अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि अगर Strait of Hormuz खुला नहीं रखा गया या ईरान के सहयोगियों ने लेबनान में परेशानी खड़ी की, तो अमेरिका फिर से हमले कर सकता है। वहीं, उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि यह ईरान के साथ नए सिरे से रिश्ते शुरू करने का मौका है, लेकिन उन्होंने साफ किया कि वे भरोसे के बजाय वेरिफिकेशन (जांच) पर ज्यादा ध्यान देंगे।
ईरानी संसद के स्पीकर Mohammad Bagher Ghalibaf ने अमेरिकी प्रस्तावों को दबाव डालने वाला बताया था। उन्होंने चेतावनी दी कि ईरान की सेना किसी भी स्थिति का जवाब देने के लिए तैयार है।
मध्यस्थों की भूमिका
इस पूरी बातचीत में कतर (Qatar) और पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई। दोनों देशों ने कहा कि बातचीत बहुत सकारात्मक माहौल में हुई और काफी तरक्की हुई है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif और सेना प्रमुख Asim Munir भी इन चर्चाओं में शामिल रहे।
