अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता होने जा रहा है। इस डील के तहत ईरान ने वादा किया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही इन्हें कहीं से खरीदेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने भी इस बात की पुष्टि की है कि दोनों देशों के बीच एक फाइनल टेक्स्ट पर सहमति बन गई है जिसे जल्द ही लागू किया जा सकता है।
समझौते की मुख्य शर्तें और नियम
अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने हमेशा के लिए परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता जताई है। हालांकि, अमेरिका ने साफ कर दिया है कि प्रतिबंधों में ढील तभी दी जाएगी जब ईरान अपनी शर्तों को पूरा करेगा। इस पूरी प्रक्रिया में भरोसा नहीं बल्कि कड़ी जांच और वेरिफिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा।
- सख्त निगरानी: प्रतिबंधों से राहत तभी मिलेगी जब ईरान सख्त निरीक्षण और वेरिफिकेशन की शर्तों को मानेगा।
- तकनीकी प्रक्रिया: MOU साइन होने के बाद 60 दिनों तक तकनीकी बातचीत होगी, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम को खत्म करने और यूरेनियम को हटाने का रास्ता निकाला जाएगा।
- नागरिक परमाणु कार्यक्रम: अमेरिका ईरान को नागरिक परमाणु ऊर्जा चलाने की अनुमति दे सकता है, लेकिन हथियार बनाने वाला बुनियादी ढांचा पूरी तरह हटाना होगा।
क्षेत्रीय शांति और अन्य फायदे
इस प्रस्तावित समझौते का असर सिर्फ परमाणु हथियारों तक सीमित नहीं है। इसमें क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण कदम शामिल किए गए हैं।
- समुद्री रास्ते: इस डील के तहत Strait of Hormuz को फिर से खोला जाएगा और ईरानी बंदरगाहों पर लगे अमेरिकी ब्लॉकेड को हटाया जाएगा।
- आतंकवाद पर रोक: समझौते में यह भी संकेत है कि ईरान अब आतंकवादी हिंसा के लिए फंडिंग नहीं करेगा।
- मिसाइल कार्यक्रम: बताया गया है कि परमाणु बातचीत के इस ढांचे में ईरान की मिसाइल क्षमताओं को शामिल नहीं किया गया है।
विवाद और अंतरराष्ट्रीय स्थिति
जहां एक तरफ ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि समझौता अब बहुत करीब है और जल्द ही डिजिटल सिग्नेचर होंगे, वहीं कुछ विवाद भी सामने आए हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरानी मीडिया की उन खबरों की आलोचना की जिनमें तुरंत प्रतिबंध हटाने की बात कही गई थी। ट्रंप ने इसे गलत जानकारी बताते हुए ईरान से माफी की मांग की।
दूसरी तरफ, उपराष्ट्रपति JD Vance ने स्पष्ट किया कि सिर्फ समझौता साइन करने से ईरान को कोई नकद राशि या फंड नहीं मिलेगा। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने 12 जून 2026 को ईरान को उसके दायित्वों के उल्लंघन का दोषी ठहराया था। फ्रांस, जर्मनी और ब्रिटेन जैसे देशों ने भी IAEA को बयान भेजकर एक स्थायी और जांच योग्य समाधान की मांग की है।
