अमेरिका और ईरान के बीच एक नया समझौता हुआ है जिससे दुनिया में शांति की उम्मीद जगी है। US वाइस प्रेसिडेंट JD Vance ने बताया कि अब ईरान अपने देश में अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षकों को वापस आने देगा। यह कदम दोनों देशों के बीच हुए एक ढांचे वाले समझौते (Framework Agreement) का हिस्सा है।

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार, 14 जून 2026 को एक शुरुआती समझौता या MOU घोषित किया था। इस समझौते का मुख्य मकसद ईरान में चल रहे संघर्ष को खत्म करना है। ट्रंप ने इस बात पर जोर दिया कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे।

इस पूरी प्रक्रिया में इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (IAEA), अमेरिका और ईरान मिलकर काम करेंगे। इन तीनों का मुख्य काम ईरान के पास मौजूद अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को पूरी तरह खत्म करना होगा। जानकारी के मुताबिक, पुराने सैन्य ऑपरेशनों के मलबे के नीचे लगभग 1,000 पाउंड (453.6 किलोग्राम) यूरेनियम दबा हुआ है, जिसे हटाया जाएगा।

इस समझौते के बारे में कुछ अहम बातें नीचे दी गई हैं:

  • इस समझौते पर औपचारिक हस्ताक्षर शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्जरलैंड के जेनेवा शहर में होंगे।
  • फिलहाल यह एक छोटा दस्तावेज़ है, जिसकी तकनीकी बारीकियों पर आगे बातचीत की जाएगी।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी हटाने पर भी सहमति बनी है।
  • परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत अगले 60 दिनों तक जारी रहेगी।

पैसों और प्रतिबंधों को लेकर JD Vance ने साफ किया कि फिलहाल ईरान को कोई पैसा नहीं दिया जाएगा और न ही उस पर लगे प्रतिबंध हटाए गए हैं। हालांकि, पड़ोसी खाड़ी देशों की मदद से ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड पर चर्चा चल रही है, लेकिन यह तभी मिलेगा जब ईरान तय शर्तों को पूरा करेगा।

कुवैत ने इस अमेरिकी-ईरानी समझौते का समर्थन किया है। कुवैत का मानना है कि इससे इस पूरे क्षेत्र में लंबे समय तक शांति बनी रहेगी। अमेरिका को उम्मीद है कि आने वाले समय में इसराइल भी इस समझौते का हिस्सा बनेगा, जिससे सुरक्षा और बेहतर होगी।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.