अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु हथियारों को रोकने के लिए चल रही बातचीत अब एक अहम मोड़ पर पहुँच गई है। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा है कि इस पूरे मामले में अमेरिका की स्थिति बहुत मजबूत है। आने वाले कुछ हफ्तों में यह तय होगा कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे झुकता है या नहीं।

उपराष्ट्रपति JD Vance का मानना है कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम काफी हद तक खत्म हो चुका है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे नतीजा कुछ भी हो, जीत अमेरिका की ही होगी। उनका दावा है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर जो आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बनाया है, उसकी वजह से बातचीत में अब सारे पत्ते अमेरिका के पास हैं।

इस्लामाबाद समझौता और नई शर्तें

17 जून 2026 को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MOU) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के तहत दोनों देशों ने फिलहाल लड़ाई रोकने और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने का फैसला किया। इसके साथ ही परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया।

  • तेल निर्यात की छूट: 22 जून 2026 को अमेरिका ने ‘जनरल लाइसेंस X’ जारी किया, जिससे ईरान को 60 दिनों के लिए अपना कच्चा तेल बेचने की इजाजत मिली।
  • जमी हुई संपत्ति: ईरान की अरबों डॉलर की संपत्ति को वापस करने की बात कही गई है, लेकिन अमेरिका का कहना है कि इस पैसे का इस्तेमाल केवल अमेरिकी कृषि उत्पाद खरीदने के लिए होगा। ईरान ने इस शर्त को मानने से इनकार किया है।
  • परमाणु निरीक्षण: JD Vance ने दावा किया कि ईरान ने IAEA के निरीक्षकों को देश में आने देने पर सहमति जताई है, लेकिन ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस बात को पूरी तरह नकार दिया है।

फिलहाल दोनों देशों के बड़े अधिकारी कतर में दोबारा बैठक करने वाले हैं। अमेरिका का मुख्य लक्ष्य ईरान को पूरी तरह परमाणु हथियारों से मुक्त करना और इलाके में सुरक्षा का नया ढांचा तैयार करना है। हालांकि, ईरान के अंदर कुछ कड़े गुट अभी भी बड़ी रियायतें देने के खिलाफ हैं।