अमेरिका और ईरान के बीच एक बहुत बड़ा समझौता हुआ है जिसे लेकर राष्ट्रपति Donald Trump ने अहम जानकारी दी है. उन्होंने कहा कि ईरान अब कभी भी परमाणु हथियार नहीं रखेगा. इस खबर से पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में हलचल तेज हो गई है क्योंकि इससे युद्ध रुकने की उम्मीद जगी है.
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राष्ट्रपति Trump ने अपनी Truth Social पोस्ट में बताया कि ईरान इस बात पर सहमत हो गया है कि वह परमाणु हथियार नहीं रखेगा. उपराष्ट्रपति JD Vance ने भी इस बात का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि Trump की नीतियों की वजह से यह संभव हुआ है और ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना उनकी सरकार का मुख्य लक्ष्य था.
इस पूरे मामले में अमेरिका और ईरान के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) साइन हुआ है. इस समझौते के तहत ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील दी जाएगी, लेकिन इसके लिए ईरान को परमाणु जांच के नियमों को मानना होगा और क्षेत्रीय सुरक्षा के वादों को पूरा करना होगा. इस डील का एक बड़ा मकसद चल रहे युद्ध को खत्म करना और शुक्रवार यानी 19 जून 2026 तक Strait of Hormuz को पूरी तरह खोलना है.
इस समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए शुक्रवार को Geneva में एक कार्यक्रम होगा. इस मौके पर अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance और ईरान के मुख्य वार्ताकार Mohammad-Bagher Ghalibaf मौजूद रहेंगे. हालांकि, राष्ट्रपति Trump ने संकेत दिया है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे.
समझौते के बाद अब परमाणु निरीक्षक फिर से ईरान जाएंगे. International Atomic Energy Agency (IAEA) की देखरेख में ईरान के पास मौजूद यूरेनियम के भंडार को कम करने की तैयारी चल रही है और इसकी तकनीकी बातों पर चर्चा हो रही है.
वहीं दूसरी तरफ, राष्ट्रपति Trump ने उन खबरों को पूरी तरह गलत बताया जिनमें कहा गया था कि अमेरिका ईरान को 300 मिलियन डॉलर दे रहा है. उन्होंने इसे फेक न्यूज़ करार दिया. ईरान के राष्ट्रपति Pezeshkian ने इस समझौते का स्वागत किया है, लेकिन ईरान के एक lawmaker Meysam Zohourian ने सावधानी बरतने की सलाह दी है. उनका कहना है कि ऐसे साइनिंग प्रोग्राम अक्सर सिर्फ मीडिया के लिए होते हैं, हकीकत कुछ और हो सकती है.