अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी दूत Steve Witkoff ने समझौते में परमाणु मुद्दे को फिर से शामिल करने के लिए नए संशोधन भेजे हैं। अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम को इधर-उधर ले जाने की कोशिश न करे, जबकि ईरान अपनी परमाणु ताकत को अपनी राष्ट्रीय संपत्ति बता रहा है।
अमेरिका की नई शर्तें और ट्रंप का सख्त रुख क्या है?
अमेरिकी दूत Steve Witkoff ने 28 अप्रैल को संशोधनों की एक लिस्ट भेजी थी। इसमें मुख्य मांग यह है कि ईरान इस बात की गारंटी दे कि वह समृद्ध यूरेनियम (enriched uranium) को कहीं भी ले जाने की कोशिश नहीं करेगा। राष्ट्रपति Donald Trump ने 1 मई को साफ कर दिया कि जब तक ईरान परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करने पर राजी नहीं होता, तब तक कोई समझौता नहीं होगा।
Steve Witkoff ने पहले यह दावा किया था कि ईरान के पास 460 किलोग्राम 60% समृद्ध यूरेनियम है। उनके मुताबिक, यह मात्रा 11 परमाणु बम बनाने के लिए काफी है और इसे बहुत कम समय में हथियार बनाने वाले स्तर तक लाया जा सकता है। इसी वजह से अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करने की मांग कर रहा है।
ईरान का क्या जवाब है और पाकिस्तान की इसमें क्या भूमिका है?
ईरान के सुप्रीम लीडर Mojtaba Khamenei ने 1 मई को राज्य टेलीविजन पर बयान दिया कि ईरान अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमताओं की रक्षा करेगा। उन्होंने इन्हें राष्ट्रीय संपत्ति बताया और कहा कि फारस की खाड़ी में बाहरी ताकतों की कोई जगह नहीं है। ईरान ने 30 अप्रैल को पाकिस्तान के जरिए अमेरिका को एक नया प्रस्ताव भी भेजा है, जिसकी जानकारी अभी व्हाइट हाउस ने सार्वजनिक नहीं की है।
पाकिस्तान इस समय दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। 30 अप्रैल को पाकिस्तान ने ईरान के लिए छह जमीनी मार्ग (overland transit routes) खोले हैं। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि अमेरिका द्वारा होरमुज जलडमरूमध्य में लगाए गए समुद्री नाकेबंदी के बावजूद ईरान तक सामान पहुंच सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका ने ईरान के सामने क्या मुख्य शर्त रखी है?
अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियारों को पूरी तरह खत्म करे और समृद्ध यूरेनियम को इधर-उधर ले जाने की कोशिश न करे।
पाकिस्तान इस विवाद में कैसे मदद कर रहा है?
पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता कर रहा है और उसने ईरान के लिए छह जमीनी रास्ते खोले हैं ताकि अमेरिकी समुद्री नाकेबंदी का असर कम हो सके।