अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों को लेकर तकनीकी स्तर की बातचीत चल रही है। दोनों देशों के बीच इस्लामाबाद में एक समझौता हुआ है, जिसके तहत 60 दिनों के लिए युद्ध विराम किया गया है ताकि पुराने विवादों को सुलझाया जा सके। इस बीच अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर 60 दिनों की विशेष छूट भी दी है।

बातचीत का दौर और समय

स्विट्जरलैंड में उच्च स्तरीय बैठकें 22 जून 2026 को खत्म हुई थीं। अब तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू हुई है, जिसके 30 जून को फिर से शुरू होने की संभावना है। पाकिस्तान और कतर इन चर्चाओं में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंदराबी ने पुष्टि की कि बातचीत जारी है और वर्तमान ठहराव केवल अस्थायी है।

अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावे

अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने कहा कि उच्च स्तरीय बातचीत ने एक अच्छी बुनियाद तैयार की है। उन्होंने दावा किया कि ईरान IAEA के निरीक्षकों को वापस बुलाने पर सहमत हो गया है। वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर कहा कि ईरान परमाणु निरीक्षण के उच्चतम स्तर के लिए पूरी तरह तैयार है ताकि परमाणु हथियारों के निर्माण को रोका जा सके।

दूसरी ओर, ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काज़ेम ग़रीबबादी ने बताया कि इस काम के लिए चार वर्किंग ग्रुप बनाए जाएंगे। इनमें प्रतिबंधों को खत्म करना, परमाणु मामले, आर्थिक विकास और निगरानी जैसे विषय होंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु निरीक्षण तभी होंगे जब सभी प्रतिबंध पूरी तरह हटा लिए जाएंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि जून 2025 में अमेरिकी और इजरायली हमलों से तबाह हुई साइट्स पर निरीक्षकों को आने की अनुमति नहीं मिलेगी।

निरीक्षण और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

IAEA के डायरेक्टर जनरल राफेल मारियानो ग्रॉसी ने इस शुरुआती समझौते का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि निरीक्षण इस अंतरिम सौदे का एक मुख्य हिस्सा है और यह निश्चित रूप से होगा। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो इस हफ्ते खाड़ी देशों के दौरे पर हैं, जहां वह इस समझौते और Strait of Hormuz की स्थिति पर चर्चा करेंगे।

प्रतिबंधों में ढील और अन्य शर्तें

इस समझौते के तहत अमेरिका ने ईरानी तेल की बिक्री पर 60 दिनों की छूट दी है। इसके साथ ही ईरान की अरबों डॉलर की जमी हुई संपत्ति को छोड़ने और पेट्रोकेमिकल निर्यात पर प्रतिबंधों में अस्थायी ढील देने पर सहमति बनी है। आगे की राहत इस बात पर निर्भर करेगी कि ईरान अंतरराष्ट्रीय निरीक्षणों में कितना सहयोग करता है।

इन चर्चाओं में लेबनान और Strait of Hormuz के मुद्दों पर भी बात हुई है। समझौते में सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को तुरंत और स्थायी रूप से रोकने का प्रावधान शामिल है। हालांकि ईरान ने Strait of Hormuz पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की बात कही है।

Sushma Kumari

Shushma covers Stories Around Expats and Helpful Contents Related to Daily life of Public. She completed Mass Communication Degree From Makhan lal Chaturvedi College Bhopal and Has 3 years of Field Experience. Earlier She Worked with Jagran Media Patna Office and Now Working with GulfHindi.com