अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर चल रही बातचीत में नया मोड़ आया है। दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन तकनीकी बातचीत की तारीखें अभी तय नहीं हो पाई हैं। इस बीच अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों से अपनी पाबंदियां हटा ली हैं जिससे जहाजों की आवाजाही आसान हो गई है।
जानकारी के मुताबिक, दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर हस्ताक्षर हुए हैं। इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य पर चर्चा करने के लिए 60 दिनों का समय तय किया गया है। इस बातचीत की समय सीमा गुरुवार, 18 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। हालांकि, व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि तकनीकी बातचीत की योजना अभी पूरी तरह फाइनल नहीं हुई है।
अमेरिका की ओर से इस बातचीत का नेतृत्व उपराष्ट्रपति J.D. Vance करने वाले थे। वह इस वीकेंड स्विट्जरलैंड के ओबबुरगन (Obbürgen) स्थित एक रिसॉर्ट में जाने वाले थे, लेकिन अब उनका यह दौरा टल गया है। व्हाइट हाउस ने बताया कि ईरानी अधिकारियों को यात्रा में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसकी वजह से यह फैसला लिया गया।
इस मामले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने बातचीत के दौरान बहुत ज़्यादा मांगें रखीं, तो ईरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। वहीं, अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ ने सांसदों को बताया है कि ईरान अपने परमाणु ठिकानों की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को बुलाने का इरादा रखता है।
एक बड़ी राहत यह मिली है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी हटा ली है। अब हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों के परमिट जारी करने की जिम्मेदारी ईरान के फारस की खाड़ी जलडमरूमध्य प्राधिकरण (Persian Gulf Strait Authority) को सौंप दी गई है।
इस पूरी प्रक्रिया में ओमान पहले मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था, लेकिन जून 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने ओमान को इस भूमिका से हटा दिया। ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि जिनेवा में किसी औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की ज़रूरत नहीं है क्योंकि दोनों देशों के राष्ट्रपति पहले ही समझौते पर साइन कर चुके हैं।