अमेरिका और ईरान के बीच एक बीच का रास्ता निकालते हुए समझौता हो गया है। इस फैसले से अब दुनिया भर में तेल की सप्लाई फिर से शुरू होगी और मार्केट में तेल की कीमतों में गिरावट आ सकती है। दोनों देशों ने सैन्य अभियानों को रोकने और बातचीत करने पर सहमति जताई है जिससे तनाव कम होने की उम्मीद है।

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दोनों देशों के बीच 17 जून 2026 को एक अंतरिम समझौता (MoU) साइन किया गया। इस समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक बातचीत होगी ताकि एक स्थायी शांति समझौता किया जा सके। अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने बताया कि यह 60 दिनों की अवधि 18 जून से शुरू हो गई है।

तेल निर्यात और समुद्री रास्तों पर बड़ा फैसला

इस डील के तहत ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ (Strait of Hormuz) को तुरंत फिर से खोलने पर सहमति दी है, जो फरवरी 2026 से लगभग बंद था। अगले 60 दिनों तक यहां से जहाजों को बिना किसी टोल के गुजरने दिया जाएगा। वहीं, अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की समुद्री नाकाबंदी (Blockade) हटा ली है, जिससे अब तेल के टैंकर फिर से अपनी आवाजाही शुरू कर चुके हैं।

अमेरिका ने ईरान को अगले 60 दिनों तक तेल निर्यात करने की विशेष छूट दी है। इसका मतलब है कि अब ईरान बिना किसी अमेरिकी प्रतिबंध के अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सकेगा।

तेल उत्पादन का ब्यौरा

युद्ध और नाकाबंदी के कारण ईरान के तेल निर्यात में भारी कमी आई थी। नीचे दी गई टेबल से समझें कि उत्पादन और निर्यात की स्थिति क्या थी:

समय/स्थिति तेल उत्पादन/निर्यात की मात्रा
2025-2026 (युद्ध से पहले) 3.2 से 3.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन
मार्च 2026 3.06 मिलियन बैरल प्रतिदिन
अप्रैल 2026 2.85 मिलियन बैरल प्रतिदिन
मई 2026 (नाकाबंदी के दौरान) कुल 2.01 मिलियन बैरल (लगभग 64,921 बैरल प्रतिदिन)
भविष्य का अनुमान युद्ध पूर्व स्तर का लगभग 70% उत्पादन तुरंत शुरू होगा

परमाणु कार्यक्रम और आर्थिक मदद

समझौते में यह भी साफ किया गया है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित नहीं करेगा और अपने यूरेनियम स्टॉक पर अगले 60 दिनों तक यथास्थिति बनाए रखेगा। इसके अलावा, क्षेत्रीय साझेदारों की मदद से ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर का एक फंड बनाने पर भी विचार किया जा रहा है।

बड़े नेताओं के बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी कि यह कोई अंतिम समझौता नहीं है और अगर ईरान ने नियमों का पालन नहीं किया तो बमबारी फिर से शुरू हो सकती है। दूसरी तरफ, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खमेनी ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत करने पर अपनी मंजूरी दे दी है। हालांकि, अमेरिका के कुछ सांसदों ने इस डील की आलोचना की है और इसे एक गलती बताया है।