अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत कराने में पाकिस्तान की भूमिका अब सवालों के घेरे में है। ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि पाकिस्तान अमेरिका को पूरी और सही जानकारी नहीं दे रहा है। इस बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ताजा जवाब से काफी नाराज हैं और उन्होंने इसे पूरी तरह अस्वीकार्य बताया है।
पाकिस्तान की भूमिका पर अमेरिका को शक क्यों है?
अमेरिकी अधिकारियों को लगता है कि पाकिस्तान ईरान की बातों को बढ़ा-चढ़ाकर या उनके पक्ष में अमेरिका के सामने रख रहा है। ट्रंप के करीबियों का कहना है कि पाकिस्तान को अमेरिका का कड़ा रुख ईरान तक पहुँचाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इसके अलावा CBS News की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने अप्रैल की शुरुआत में ईरान के सैन्य विमानों, जिनमें RC-130 टोही विमान भी शामिल थे, को नूर खान एयरबेस पर रुकने की अनुमति दी थी। अमेरिका को शक है कि पाकिस्तान ने ऐसा उन्हें अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए किया। अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के माइकल रुबिन ने कहा कि पाकिस्तान की इस मध्यस्थता से अमेरिका की किरकिरी हो सकती है।
ईरान ने क्या मांगें रखीं और ट्रंप ने क्या कहा?
ईरान ने पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए अमेरिका को अपना जवाब भेजा था। ईरान की मुख्य मांगें इस प्रकार थीं:
- अमेरिका सभी प्रतिबंध हटाए और नाकाबंदी खत्म करे।
- क्षेत्र से अमेरिकी सेना वापस ली जाए और लड़ाई पूरी तरह बंद हो।
- यूरेनियम संवर्धन (Uranium enrichment) को 5 साल के लिए रोका जाए, लेकिन इससे ज्यादा समय के लिए नहीं।
- ईरान ने अपनी जमीन के नीचे बनी परमाणु सुविधाओं को हटाने से साफ मना कर दिया।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस जवाब को बेकार और मूर्खतापूर्ण बताया। वह इस बात से इतने नाराज हैं कि अब वह दोबारा सैन्य अभियान शुरू करने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।
क्या अब बातचीत पूरी तरह बंद हो जाएगी?
एक तरफ ट्रंप प्रशासन में नाराजगी है, तो दूसरी तरफ व्हाइट हाउस की प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने पहले पाकिस्तान को बेहतरीन मध्यस्थ बताया था। पाकिस्तान सरकार के सूत्रों का कहना है कि वह अपनी कोशिशें जारी रखेगा और फिलहाल युद्ध शुरू होने का कोई खतरा नहीं है। इस मामले में केवल पाकिस्तान ही नहीं, बल्कि कतर और मिस्र भी अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत का रास्ता खुला रखने में मदद कर रहे हैं।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ईरान ने अमेरिका के सामने क्या प्रस्ताव रखा है?
ईरान ने प्रतिबंध हटाने, अमेरिकी सेना की वापसी और यूरेनियम संवर्धन को 5 साल तक रोकने का प्रस्ताव दिया है, लेकिन वह अपनी परमाणु साइट्स को खत्म करने के खिलाफ है।
अमेरिका पाकिस्तान की मध्यस्थता से क्यों नाखुश है?
अमेरिका को लगता है कि पाकिस्तान तटस्थ नहीं है और उसने ईरानी सैन्य विमानों को अपने एयरबेस पर जगह देकर उनकी मदद की है।
