अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म हो सकता है. पाकिस्तान की मध्यस्थता के बाद दोनों देशों के बीच एक शांति समझौते के टेक्स्ट पर सहमति बनी है. पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इसकी पुष्टि की है, हालांकि अमेरिका की तरफ से इस मामले में कुछ अलग बातें सामने आ रही हैं.
पाकिस्तान की मध्यस्थता और समझौते की खबर
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हो गया है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान फिलहाल दोनों देशों के साथ मिलकर अगले कदमों को अंतिम रूप देने में जुटा है. शरीफ ने यह भी कहा कि शांति अब पहले से कहीं ज्यादा करीब है. उन्होंने चेतावनी दी कि कुछ लोग इस समझौते को खराब करने के लिए गलत खबरें फैला रहे हैं.
ईरान और अमेरिका के बयानों में अंतर
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस संभावित समझौते को ‘इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ (Islamabad Memorandum of Understanding) कहा है. उन्होंने कहा कि यह समझौता होने के बहुत करीब है और जल्द ही इसकी पूरी जानकारी जनता को दी जाएगी. दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों में विरोधाभास दिखा. पहले उन्होंने इसे एक ‘बड़ा सेटलमेंट’ बताया और ईरान पर होने वाले हमलों को रद्द कर दिया. लेकिन बाद में उन्होंने ईरानी मीडिया की खबरों को खारिज कर दिया और ईरान के नेतृत्व को गैर-जिम्मेदार बताया.
समझौते की मुख्य बातें
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समझौते में कई अहम मुद्दे शामिल किए गए हैं:
- सीजफायर यानी युद्धविराम को 60 दिनों के लिए आगे बढ़ाया जाएगा.
- Strait of Hormuz (हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य) को दोबारा खोला जाएगा ताकि 30 दिनों के भीतर जहाजों की आवाजाही पहले जैसी हो सके.
- ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू होगी.
- ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति को वापस करने पर चर्चा हुई है, लेकिन अमेरिका ने कहा कि यह तभी होगा जब ईरान शर्तों को मानेगा.
- अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को खत्म करे, जबकि ईरान अपनी यूरेनियम संवर्धन के अधिकार पर अड़ा है.
क्षेत्र में बढ़ता तनाव और अन्य देश
इस शांति वार्ता के बीच जमीन पर तनाव अब भी बना हुआ है. खबर है कि 11 जून को अमेरिकी सेना ने ईरान के दो ड्रोन गिराए और 12 जून को ईरान ने Strait of Hormuz में एक टैंकर को रोका. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पूरे मामले में सऊदी अरब, UAE, कतर, तुर्की, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और मिस्र जैसे देशों की भूमिका का भी जिक्र किया है. वहीं, इसराइल ने साफ किया है कि वह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकता है.
