अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म होने वाला है। पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देशों के बीच एक बड़ा शांति समझौता हुआ है। इस समझौते पर कल शुक्रवार, 19 जून 2026 को स्विट्ज़रलैंड में आधिकारिक तौर पर दस्तखत किए जाएंगे। इस खबर से पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में बड़ी राहत मिली है।
इन देशों ने निभाई अहम भूमिका
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस शांति समझौते की जानकारी दी है। इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम किया, जिसमें प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने बड़ी भूमिका निभाई। इनके अलावा सऊदी अरब, कतर और तुर्किये ने भी बातचीत को सफल बनाने में पूरा सहयोग दिया। सऊदी अरब ने इस समझौते का स्वागत किया है और मध्यस्थता के प्रयासों की तारीफ की है।
समझौते की मुख्य बातें
इस डील के तहत कई बड़े फैसले लिए गए हैं जो दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए जरूरी हैं:
- सैन्य कार्रवाई पर रोक: लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी तौर पर बंद कर दिए जाएंगे।
- Strait of Hormuz की बहाली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस जलमार्ग को टोल फ्री खोलने और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाने का आदेश दिया है। ईरान अगले 60 दिनों तक व्यापारिक जहाजों को बिना किसी शुल्क के यहाँ से आने-जाने देगा।
- पाबंदियों से राहत: ईरान पर लगी पाबंदियों को धीरे-धीरे हटाया जाएगा और ईरान की फ्रीज की गई संपत्ति वापस कर दी जाएगी।
- परमाणु कार्यक्रम: ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम के स्टॉक को हटाने या नष्ट करने का काम IAEA की निगरानी में होगा, जिसकी शर्तें अगले 60 दिनों में तय की जाएंगी।
दुनिया भर में खुशी का माहौल
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस कदम को संघर्ष खत्म करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव बताया है। इसके साथ ही ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने भी इस समझौते का स्वागत किया है। यह डील न केवल अमेरिका और ईरान के लिए बल्कि इराक, सीरिया और लेबनान जैसे देशों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।