अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब खत्म होने की कगार पर है। 23 मई 2026 को सामने आई ताजा जानकारी के अनुसार, दोनों देशों के बीच सभी मोर्चों पर जंग खत्म करने के लिए एक समझौता होने की संभावना है। दोनों पक्ष एक शुरुआती समझौते को तैयार करने के आखिरी दौर में पहुंच चुके हैं। अगर यह समझौता होता है, तो खाड़ी क्षेत्र और पूरे मिडिल ईस्ट में जारी तनाव काफी हद तक कम हो सकता है।
समझौते में क्या-क्या शर्तें रखी गई हैं?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने इसकी पुष्टि की है कि ईरान समझौते के मसौदे को अंतिम रूप दे रहा है। ईरान की तरफ से मुख्य मांगें और शर्तें इस प्रकार रखी गई हैं:
- सभी मोर्चों पर तुरंत लड़ाई रोकी जाएगी, जिसमें लेबनान का मोर्चा भी मुख्य रूप से शामिल है।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी को हटाया जाएगा ताकि व्यापार सामान्य हो सके।
- परमाणु कार्यक्रम जैसे जटिल मुद्दों पर चर्चा इस शुरुआती समझौते में नहीं होगी, इसे आगे की बातचीत के लिए टाल दिया गया है।
हालांकि, ईरान के प्रवक्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि दोनों देशों के बीच मतभेद बहुत गहरे हैं, इसलिए तुरंत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने इस समझौते की स्थिति को बहुत दूर और बहुत करीब के बीच का बताया है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य नेताओं का क्या कहना है?
इस पूरे मामले पर अमेरिकी प्रशासन की तरफ से भी बड़ी प्रतिक्रियाएं आई हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि बातचीत में कुछ प्रगति देखी गई है और जल्द ही कोई खबर आ सकती है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस बात की पुष्टि की है कि दोनों पक्ष समझौते के काफी करीब हैं, लेकिन उन्होंने समझौते या फिर से जंग शुरू होने की आधी-आधी संभावना भी जताई है। इस बातचीत को सफल बनाने में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और दूत जेरेड कुश्नर ने भी अहम भूमिका निभाई है। अमेरिकी सरकार से इस प्रस्ताव पर रविवार 24 मई 2026 तक जवाब देने की उम्मीद की जा रही है।
पाकिस्तान और खाड़ी देशों ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका
इस समझौते को अमली जामा पहनाने में पाकिस्तान ने एक बड़े मध्यस्थ के रूप में काम किया है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल जनरल आसिम मुनीर ने तेहरान का दौरा कर इस मामले में बातचीत की है। वहीं सऊदी अरब, यूएई, कतर, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे क्षेत्रीय देशों ने भी अमेरिका से अपील की है कि वह इस समझौते को स्वीकार करे ताकि इलाके में जंग को बढ़ने से रोका जा सके।
Frequently Asked Questions (FAQs)
क्या इस समझौते से ईरान का परमाणु विवाद सुलझ जाएगा?
नहीं, ईरान और अमेरिका के बीच हो रहे इस शुरुआती समझौते में परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को शामिल नहीं किया गया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर बाद में बातचीत की जाएगी, फिलहाल मुख्य ध्यान सिर्फ लड़ाई रोकने पर है।
समझौते को लेकर अंतिम फैसला कब तक आ सकता है?
दोनों पक्षों के बीच अगले 48 घंटों में इस समझौते पर बड़ा फैसला होने की उम्मीद है। अमेरिका की तरफ से रविवार 24 मई 2026 तक ईरान के इस नए प्रस्ताव पर जवाब आ सकता है।
