अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump और ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने फ्रांस के Versailles में एक बड़ा समझौता किया है. इस 14 पॉइंट के MoU के जरिए दोनों देशों ने अपनी दुश्मनी खत्म कर शांति की ओर कदम बढ़ाया है. यह समझौता तुरंत लागू हो गया है और अब अगले 60 दिनों तक शांति की प्रक्रिया चलेगी.
इस पूरी डील में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई. उन्होंने कन्फर्म किया कि इस समझौते के बाद ईरान तुरंत Strait of Hormuz को फिर से खोलेगा और अमेरिका भी अपनी नौसेना की नाकाबंदी को तुरंत हटा लेगा. फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron ने इस डील को सही दिशा में एक बड़ा कदम बताया है.
समझौते की मुख्य बातें
- अमेरिका ने ईरान को तेल बेचने के लिए प्रतिबंधों में ढील दी है.
- बदले में ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम की मात्रा को कम करेगा.
- अगर परमाणु कार्यक्रम पर अंतिम सहमति बनती है, तो अमेरिका ईरान के लिए 300 अरब डॉलर का पुनर्निर्माण फंड जारी करेगा.
- लेबनान में तत्काल युद्धविराम और हिजबुल्लाह के निशस्त्रीकरण की मांग की गई है.
राष्ट्रपति Donald Trump ने Versailles में डिनर के बाद बताया कि समझौता साइन हो गया है. हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर अगले 60 दिनों के भीतर अंतिम बातचीत विफल रहती है, तो अमेरिका फिर से बमबारी शुरू कर सकता है. वहीं, ईरान के राष्ट्रपति Masoud Pezeshkian ने पहले ही कहा था कि अगर यह समझौता पूरी तरह लागू होता है, तो यह देश के लिए गर्व की बात होगी.
G7 देशों के नेताओं ने इस समझौते को एक ऐतिहासिक अवसर माना है. उनका कहना है कि इससे ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जा सकता है. इस खबर के आते ही एशियाई बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट देखी गई है.
यह पूरा मामला तब सामने आया जब राष्ट्रपति Trump ने बुधवार, 17 जून 2026 को Versailles में राष्ट्रपति Macron के साथ डिनर के दौरान इस दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते का मकसद लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियानों को स्थायी रूप से बंद करना है.