अमेरिका और ईरान के बीच पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव को खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता हुआ है। दोनों देशों ने 14 पॉइंट के एक ज्ञापन (MoU) पर सहमति जताई है ताकि इलाके में शांति बहाल हो सके। इस समझौते के तहत युद्ध रोकने और आर्थिक मदद देने की बात कही गई है, जिससे पूरी दुनिया की नज़र अब इस क्षेत्र पर है।
समझौते की समय सीमा और मुख्य तारीखें
इस शांति प्रक्रिया के तहत 7 अप्रैल 2026 को पहले संघर्ष विराम (ceasefire) पर सहमति बनी थी। इसके बाद 17 जून 2026 को अमेरिका के अधिकारियों ने MoU के पॉइंट्स की जानकारी दी और 18 जून 2026 को ईरान सरकार ने भी इसे जारी किया। अब दोनों देशों के पास अंतिम शांति समझौते पर बातचीत करने और हस्ताक्षर करने के लिए 60 दिन का समय है। इस पूरे समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) के प्रस्ताव के जरिए मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
MoU के मुख्य नियम और शर्तें
समझौते में कई अहम बातों को शामिल किया गया है ताकि भविष्य में लड़ाई न हो। इसकी मुख्य शर्तें नीचे दी गई टेबल में समझी जा सकती हैं:
| मुख्य बिंदु | तय की गई शर्त |
|---|---|
| सैन्य ऑपरेशन | लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद होगी। |
| परमाणु कार्यक्रम | ईरान अगले 60 दिनों तक अपना परमाणु कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ाएगा। |
| प्रतिबंध (Sanctions) | अमेरिका इस दौरान ईरान पर कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा और तेल बिक्री के लिए छूट देगा। |
| आर्थिक मदद | अमेरिका और उसके साथी ईरान के पुनर्निर्माण के लिए कम से कम $300 बिलियन का फंड जुटाएंगे। |
| जमी हुई रकम | बातचीत की प्रगति के आधार पर ईरान को अपनी जमी हुई रकम वापस मिलेगी। |
| समुद्री रास्ता | अंतिम समझौते के 30 दिन के भीतर Strait of Hormuz में जहाजों की आवाजाही सामान्य होगी। |
| सेना की वापसी | समझौता पूरा होने के 30 दिन के अंदर अमेरिका अपनी सेना को आसपास के इलाकों से हटा लेगा। |
बड़े अधिकारियों और एक्सपर्ट्स की राय
इस समझौते पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने कहा कि शांति अब बहुत करीब है और टेक्स्ट पर सहमति बन चुकी है। ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने भी संकेत दिया कि समझौता होने की पूरी संभावना है।
वहीं, पूर्व राजनयिक YK Sinha ने इस समझौते की मजबूती पर शक जताया है। उन्होंने कहा कि बातचीत की मेज पर कुछ अहम देशों का शामिल न होना एक बड़ी चुनौती हो सकता है। दूसरी तरफ, अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने चेतावनी दी है कि यह सिर्फ एक शुरुआती ढांचा है। उन्होंने साफ कहा कि अगर ईरान ने अपनी शर्तों को नहीं माना, तो अमेरिका फिर से सैन्य कार्रवाई कर सकता है।
