अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कुछ महीनों से चल रही जंग अब हमेशा के लिए खत्म हो सकती है। दोनों देशों के बीच एक अंतिम शांति समझौते को लेकर बातचीत बहुत आगे बढ़ चुकी है और 24 मई 2026 यानी रविवार को इसका आधिकारिक ऐलान होने की उम्मीद जताई जा रही है। वाशिंगटन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों पक्ष एक समझौते के बेहद करीब हैं जिससे खाड़ी क्षेत्र में फिर से शांति बहाल हो सकती है। इस बड़े बदलाव पर पूरी दुनिया और खासकर खाड़ी देशों में रहने वाले लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।
शांति समझौते में क्या-क्या शर्तें शामिल की गई हैं?
दोनों पक्षों के बीच जिस मसौदे पर सहमति बनी है, उसमें खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा से जुड़ी कई बड़ी बातें शामिल हैं। इस समझौते के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
- पूर्ण युद्धविराम: दोनों देशों के बीच तुरंत प्रभाव से पूरी तरह युद्धविराम लागू किया जाएगा।
- सुरक्षित जलमार्ग: व्यापार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही की पूरी गारंटी दी जाएगी।
- प्रतिबंधों में ढील: अमेरिका द्वारा ईरान के फ्रीज किए गए पैसों को वापस जारी करने और अमेरिकी प्रतिबंधों को धीरे-धीरे हटाने पर सहमति बनी है।
- हमलों पर रोक: एक-दूसरे के सैन्य, नागरिक या आर्थिक बुनियादी ढांचे को निशाना न बनाने और मीडिया में चल रहे प्रचार युद्ध को पूरी तरह रोकने पर सहमति बनी है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी नेताओं का क्या कहना है?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 मई 2026 को व्हाइट हाउस में बातचीत के दौरान कहा कि दोनों देश समझौते के बहुत करीब पहुंच रहे हैं। ट्रंप रविवार को अपने वार्ताकारों से मिलकर अंतिम फैसले पर विचार करेंगे। हालांकि उन्होंने बातचीत के दौरान यह भी साफ किया कि अच्छे समझौते और दोबारा सैन्य कार्रवाई के बीच 50-50 की संभावना बनी हुई है।
दूसरी तरफ, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि वे समझौते का मसौदा तैयार करने के अंतिम चरण में हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि परमाणु मुद्दे इस शांति समझौते का हिस्सा नहीं हैं। हालांकि, ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने फिर से हमला शुरू किया तो उसे कड़ा जवाब दिया जाएगा क्योंकि ईरान की सेना ने युद्धविराम के दौरान अपनी ताकत को फिर से मजबूत कर लिया है।
इस शांति समझौते में किन देशों ने निभाई बड़ी भूमिका?
अमेरिका और ईरान को एक मंच पर लाने के लिए कई देशों ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। पाकिस्तान इसमें मुख्य मध्यस्थ के रूप में काम कर रहा है, जिसके फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने तेहरान में जाकर अहम बैठकें की हैं। इसके अलावा कतर ने भी बातचीत को सफल बनाने के लिए अपना प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा है। सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान अल सउद ने भी बातचीत को आगे बढ़ाने के अमेरिकी फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षा और शांति बहाल करने के लिए यह समझौता बेहद जरूरी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध कब शुरू हुआ था और युद्धविराम कब लगा?
दोनों देशों के बीच जंग की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी, जिसके बाद 8 अप्रैल 2026 से एक अस्थायी युद्धविराम लागू है।
क्या इस शांति समझौते में परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा भी शामिल है?
नहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया है कि परमाणु मुद्दे इस शांति समझौते का हिस्सा नहीं हैं, यह बातचीत केवल जंग रोकने पर केंद्रित है।
इस शांति समझौते में पाकिस्तान और कतर की क्या भूमिका है?
पाकिस्तान और कतर दोनों देश इस समझौते को कराने में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं और लगातार दोनों पक्षों के संपर्क में हैं।
