अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े शांति समझौते की तैयारी चल रही है, लेकिन 12 अरब डॉलर की जमी हुई रकम को लेकर दोनों देशों में विवाद खड़ा हो गया है। शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के जिनेवा में इस समझौते पर हस्ताक्षर होने हैं, लेकिन पैसा रिलीज करने की शर्तों पर दोनों देशों की राय अलग-अलग है।

क्या है पूरा मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने 13 और 14 जून 2026 को ऐलान किया था कि ईरान के साथ शांति समझौता हो गया है। इसके बाद उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को खत्म करने का आदेश भी दिया था।

ईरान का दावा है कि एक 14-पॉइंट के समझौते (MoU) के तहत अमेरिका को कुल 24 अरब डॉलर की जमी हुई रकम वापस करनी होगी। ईरान चाहता है कि बातचीत शुरू होने से पहले ही 12 अरब डॉलर की पहली किस्त उसे दे दी जाए। ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने साफ किया है कि जब तक अमेरिका पैसा नहीं लौटाता और नाकेबंदी खत्म नहीं करता, तब तक अंतिम डील मुश्किल है।

अमेरिका का क्या कहना है

दूसरी तरफ, अमेरिकी अधिकारियों ने ईरान के दावों को खारिज कर दिया है। अमेरिका का कहना है कि जब तक ईरान समझौते की सभी शर्तों को पूरी तरह नहीं मानता, तब तक कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। राष्ट्रपति Trump ने पहले ही कह दिया था कि जब तक नोटिस नहीं आता, तब तक कोई पैसा नहीं दिया जाएगा। अमेरिका इसे ‘पे-फॉर-परफॉर्मेंस’ डील मान रहा है, यानी काम होगा तभी पैसा मिलेगा।

महत्वपूर्ण जानकारियां

विवरण जानकारी
समझौते की तारीख 19 जून 2026 (शुक्रवार)
स्थान जिनेवा, स्विट्जरलैंड
कुल विवादित रकम 24 अरब डॉलर (ईरान का दावा)
तुरंत मांगी गई रकम 12 अरब डॉलर
मध्यस्थ देश पाकिस्तान

इस समझौते में पाकिस्तान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। उम्मीद है कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति J.D. Vance और ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi इस साइनिंग इवेंट में शामिल होंगे। फिलहाल अमेरिका अपनी ‘Economic Fury’ रणनीति जारी रखे हुए है ताकि ईरान के सैन्य नेटवर्क को रोका जा सके।