अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ा समझौता होने जा रहा है जिससे मिडिल ईस्ट में शांति की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के नए नेतृत्व को ‘समझदार’ बताया है। दोनों देशों के बीच एक एमओयू (MOU) तैयार हुआ है जिससे युद्ध खत्म होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जाएगा।

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इस समझौते के तहत ईरान ने वादा किया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इसके अलावा ईरान के पास मौजूद यूरेनियम के स्टॉक को कम करने पर बात होगी, जिसकी निगरानी IAEA करेगा। 19 जून को स्विट्जरलैंड में इस शांति समझौते पर आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर होंगे।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व पहले के मुकाबले ज्यादा समझदार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद ईरान में शासन बदलना नहीं था। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह ईरान के नए सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई से सीधी बात करने के लिए तैयार हैं क्योंकि वह उनके पिता से ज्यादा समझदार हैं।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस नीति की तारीफ की और कहा कि इससे ईरान कभी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। वहीं ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने इस कदम का स्वागत किया और इसे देश के लिए गर्व की बात बताया। हालांकि, सीआईए डायरेक्टर जॉन रैटलिफ ने ईरान द्वारा परमाणु शर्तों को मानने पर कुछ संदेह जताया है।

इस समझौते का असर खाड़ी देशों पर भी पड़ेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह खुलने से समुद्री व्यापार फिर से आसान होगा। कतर ने इस स्थिति को देखते हुए अपनी LNG गैस का उत्पादन तेजी से बढ़ाने की योजना बनाई है। हाल ही में ईरानी जहाज बिना किसी रोक-टोक के अमेरिकी नौसेना के घेरे से गुजरे हैं।

संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने इस शांति समझौते का स्वागत किया है। फ्रांस, जर्मनी, इटली और ब्रिटेन जैसे देश भी ईरान द्वारा परमाणु शर्तों को मानने और उनके सत्यापन के बाद प्रतिबंध हटाने के लिए तैयार हैं। इस पूरे समझौते में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता की भूमिका रही है।

Aanya

Aanya is Ex IndiaTV Journalist. She covers Expats oriented news, views and interviews With deep understanding of what Hindi Speaking people needs as updates in daily life to avoid fines, comply rules and stay updated.