अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़े शांति समझौते की खबरें सामने आ रही हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने जानकारी दी है कि डील का टेक्स्ट तैयार हो गया है। हालांकि, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबफ ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है और साफ कहा है कि अब सिर्फ वादे नहीं, बल्कि उन्हें पूरा करना होगा।
क्या है यह शांति समझौता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते का आखिरी मसौदा तैयार हो गया है। पाकिस्तान अब दोनों देशों को अगले कदमों को पूरा करने में मदद कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस डील के तहत ईरान को अपना परमाणु कार्यक्रम खत्म करना होगा और अमेरिका को वहां से परमाणु सामग्री वापस ले जाने की इजाजत होगी। इस समझौते में होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरानी बंदरगाहों से अमेरिकी नाकेबंदी हटाने की बात भी शामिल है।
अमेरिका और अन्य देशों का रुख
अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता अमेरिका और उसके सहयोगियों के हितों को प्राथमिकता देगा। उन्होंने साफ कहा कि सिर्फ समझौते पर हस्ताक्षर करने के बदले ईरान को कोई नकद पैसा या जमा किए गए फंड नहीं दिए जाएंगे। फ्रांस ने भी अमेरिका और ईरान से इस मौके का फायदा उठाने और जल्द से जल्द डील साइन करने की अपील की है। वहीं, इसराइल इस डील की पूरी समीक्षा करने के बाद ही इसका समर्थन करेगा।
ईरान की चेतावनी और विरोध
ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागर गालिबफ ने सोशल मीडिया पर लिखा कि जो वादे किए गए हैं, उन्हें पूरा करना होगा। उन्होंने कहा कि अब कोई ‘अगर-मगर’ या बहाने नहीं चलेंगे और जो जैसा बोएगा वैसा ही काटेगा। इससे पहले गालिबफ कह चुके थे कि ईरान को बातचीत से नहीं बल्कि मिसाइलों से रियायतें मिलती हैं और उन्हें केवल शब्दों पर भरोसा नहीं है।
दूसरी ओर, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बग़ाई ने इन खबरों को केवल अटकलें बताया है। उन्होंने कहा कि अभी कुछ भी फाइनल नहीं हुआ है क्योंकि अमेरिका ने बहुत ज्यादा मांगें रखी हैं और ईरान अपनी लक्ष्मण रेखा से पीछे नहीं हटेगा।
समुद्री क्षेत्र में तनाव
इसी बीच 12 जून 2026 को ईरान के सिरीक और केशम द्वीप के पास धमाकों की खबरें आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये धमाके होर्मुज जलडमरूमध्य में हुई झड़पों की वजह से हुए थे।
