अमेरिका और ईरान के बीच सालों से चल रही जंग को खत्म करने के लिए एक बड़ा समझौता होने जा रहा है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि दोनों देशों के बीच डील पूरी हो गई है. हालांकि, इसी बीच इसराइल द्वारा लेबनान में किए गए हमलों ने माहौल को फिर से तनावपूर्ण बना दिया है.

समझौते की मुख्य बातें

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सोशल मीडिया साइट Truth Social पर ऐलान किया कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का समझौता हो चुका है. इस डील में सबसे अहम बात यह है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिकी नौसेना ने जो नाकाबंदी की थी, उसे हटा लिया जाएगा.

इसराइल का हमला और तनाव

एक तरफ जहां शांति की बातें हो रही थीं, वहीं दूसरी तरफ इसराइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला बोल दिया. लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इस हमले में 3 लोगों की जान गई और 16 लोग घायल हुए. इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज़ ने कहा कि यह हमला हिजबुल्लाह द्वारा किए गए ड्रोन हमलों का जवाब था और इसराइल अपनी जमीन पर होने वाली फायरिंग को बर्दाश्त नहीं करेगा.

ईरान और अमेरिका की प्रतिक्रिया

  • ईरान का रुख: ईरान के विदेश मंत्रालय ने इस हमले के लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है और कड़ी चेतावनी दी है. ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागर गालिबफ ने कहा कि अगर अमेरिका अपने वादे निभाने की क्षमता नहीं रखता, तो आगे बातचीत करने का कोई फायदा नहीं है.
  • डोनाल्ड ट्रंप की अपील: राष्ट्रपति ट्रंप ने सभी देशों से हमले रोकने की अपील की है. उन्होंने ट्वीट किया कि क्षेत्र में शांति समझौता बहुत करीब है और इसे बर्बाद नहीं करना चाहिए. उन्होंने यह भी बताया कि इसराइल के हमले की वजह से समझौते पर साइन होने में कुछ घंटों की देरी हुई है.

समझौते पर इसराइल की नाराजगी

खबरों के मुताबिक, इसराइल सरकार इस डील से काफी निराश है. उन्हें लगता है कि बातचीत के दौरान उन्हें नजरअंदाज किया गया. ईरान की मांग थी कि समझौते के तहत इसराइल को हिजबुल्लाह पर बमबारी बंद करनी होगी और दक्षिणी लेबनान से अपनी मौजूदगी खत्म करनी होगी.

आगे क्या होगा

अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा कि पाकिस्तान की मदद से चल रही यह बातचीत सही रास्ते पर है. उन्होंने साफ किया कि डील को लंबे समय तक चलाने के लिए ईरान को हिजबुल्लाह को पीछे हटाना होगा. इस शांति समझौते पर हस्ताक्षर 19 जून को स्विट्जरलैंड में होने की उम्मीद है.

वहीं, इसराइल मामलों के विश्लेषक डैन पेरी ने कहा कि अमेरिका शायद यह दिखावा करे कि इसराइल हिजबुल्लाह पर हमला नहीं कर सकता, ताकि किसी भी तरह इस डील को पूरा किया जा सके.