अमेरिका और ईरान के बीच एक बड़ी शांति डील होने की चर्चा अब बेहद तेज़ हो गई है। अमेरिकी सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, दोनों देशों के बीच चल रही बातचीत लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक पूरी हो चुकी है। इस बीच, इसराइल ने साफ कर दिया है कि वह अमेरिका द्वारा कराए जा रहे किसी भी समझौते के बावजूद लेबनान और अन्य क्षेत्रीय खतरों के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई जारी रखेगा। इस मुद्दे पर इसराइल के अंदर ही प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की नीतियों का कड़ा विरोध शुरू हो गया है और विपक्षी नेता उन पर सवाल उठा रहे हैं।

ℹ: GCC Anniversary: खाड़ी देशों के संगठन GCC के पूरे हुए 45 साल, अरब संसद ने बधाई देते हुए कही बड़ी बात

अमेरिका और ईरान के बीच क्या समझौता होने जा रहा है?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) और विदेश मंत्री मार्को रुबियो (Marco Rubio) के बयानों के अनुसार, यह समझौता अंतिम चरण में है। इस डील के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

  • होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलना: समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के रास्ते व्यापार को फिर से सुचारू रूप से शुरू किया जाएगा।
  • परमाणु कार्यक्रम पर रोक: ईरान अपने अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम के स्टॉक को नष्ट करने और अपने परमाणु कार्यक्रम को सीमित रखने पर चर्चा के लिए तैयार हुआ है।
  • प्रतिबंधों में राहत: नियमों का पालन करने के बाद ईरान को धीरे-धीरे प्रतिबंधों से राहत दी जाएगी।

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि बातचीत अच्छी चल रही है, लेकिन अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका पहले से भी ज़्यादा सख्त और बड़ी कार्रवाई करेगा। वहीं, ईरान के अधिकारियों का कहना है कि फंसे हुए फंड को जारी करने जैसे एक-दो मुद्दों पर अभी भी अमेरिका के साथ मतभेद बने हुए हैं।

लेबनान और हमलों को लेकर इसराइल का क्या स्टैंड है?

इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने दावा किया है कि उन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से पूरा आश्वासन मिला है कि इसराइल को लेबनान सहित सभी मोर्चों पर अपनी रक्षा के लिए सैन्य कार्रवाई करने की पूरी छूट रहेगी। इस बीच, इसराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान के 10 गांवों के निवासियों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर जाने की नई चेतावनी जारी की है।

दूसरी ओर, लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने स्पष्ट किया है कि दक्षिणी लेबनान से इसराइली सेना की पूरी वापसी की मांग पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, हिज़बुल्लाह के नेता नईम कासिम ने इसराइल के साथ किसी भी सीधी बातचीत से साफ इनकार किया है और लेबनान सरकार से इस्तीफे की मांग की है।

इसराइल के भीतर प्रधानमंत्री नेतन्याहू की आलोचना क्यों हो रही है?

इसराइल के विपक्षी नेता यायर लैपिड ने इस संभावित डील की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाला यह समझौता इसराइल और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। विपक्षी पार्टी के नेता एविग्डोर लिबरमैन ने आरोप लगाया कि नेतन्याहू ने ईरान और लेबनान से जुड़े अहम मामलों का नियंत्रण पूरी तरह अमेरिका के हाथ में दे दिया है, जिससे देश की स्थिति कमजोर हुई है। इसराइली नेताओं का मानना है कि इस पूरी बातचीत से इसराइल को बाहर रखा गया है, जो बेहद चिंताजनक बात है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले समझौते की मुख्य शर्तें क्या हैं?

इस समझौते के तहत होर्मुज जलडमरूमध्य व्यापार मार्ग को फिर से खोला जाएगा, ईरान के यूरेनियम संवर्धन पर अस्थायी रोक लगाई जाएगी और इसके बदले में ईरान को कुछ चरणों में प्रतिबंधों से राहत मिलेगी।

क्या अमेरिकी समझौते के बाद इसराइल लेबनान पर हमले रोक देगा?

इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने स्पष्ट किया है कि उन्हें अमेरिका से अपनी सुरक्षा और लेबनान सहित सभी मोर्चों पर खतरे के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने की पूरी आज़ादी मिली हुई है, इसलिए हमले नहीं रुकेंगे।

इसराइल के विपक्षी नेता नेतन्याहू से क्यों नाराज हैं?

विपक्षी नेताओं का आरोप है कि इस समझौते की बातचीत में इसराइल को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया है और नेतन्याहू अमेरिकी फैसलों को रोकने या प्रभावित करने में पूरी तरह नाकाम रहे हैं।