अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता होने से दुनिया भर में हलचल मच गई है। दोनों देशों ने एक इलेक्ट्रॉनिक समझौते (MOU) पर साइन किए हैं, जिससे अगले 60 दिनों के लिए बातचीत का रास्ता खुल गया है। इस बीच, ईरान में भारत के पूर्व राजदूत Dinkar Srivastava ने कहा है कि इस डील में परमाणु तकनीकी मुद्दों को सुलझाना सबसे आसान काम होगा।

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परमाणु मुद्दे पर क्या बोले पूर्व राजदूत

Dinkar Srivastava ने 15 जून 2026 को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते में आने वाली तकनीकी रुकावटें बहुत कम हैं और इन्हें आसानी से दूर किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि 2015 में जो डील हुई थी, उसका तकनीकी ढांचा अभी भी सही है। उनके मुताबिक, ईरान द्वारा यूरेनियम का 3.67% संवर्धन (enrichment) Nuclear Non-Proliferation Treaty (NPT) के नियमों के अंदर ही था।

Srivastava ने यह भी कहा कि अगर राष्ट्रपति ट्रंप या अमेरिका के कड़े रुख वाले नेता डील की समय सीमा को लेकर सवाल उठाते हैं, तो इस समझौते या इसकी जांच प्रक्रिया को बढ़ाकर इस समस्या का हल निकाला जा सकता है। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि इसराइल के लक्ष्य इस कूटनीतिक समझौते से बिल्कुल अलग हैं और वह ईरान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं चाहता।

समझौते की मुख्य बातें और अपडेट

14 जून 2026 को अमेरिका और ईरान के बीच इस शांति समझौते का ऐलान किया गया। इस डील के बाद कई बड़े फैसले लिए गए हैं:

  • Strait of Hormuz: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की समुद्री नाकेबंदी हटाने और इसे तुरंत खोलने का आदेश दिया है।
  • औपचारिक हस्ताक्षर: इस समझौते पर औपचारिक रूप से साइन करने की रस्म शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होगी।
  • 60 दिनों का समय: इलेक्ट्रॉनिक रूप से साइन किए गए MOU के बाद अब 60 दिनों की एक विंडो खुली है, जिसमें प्रतिबंधों में ढील और परमाणु कार्यक्रम पर विस्तार से बातचीत होगी।

अन्य देशों और नेताओं की राय

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने इस डील का स्वागत किया और कहा कि इससे लेबनान समेत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से खत्म हो जाएंगे। वहीं, अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD Vance ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और ईरान के परमाणु हथियार न बनाने के वादे को अमेरिका की बड़ी जीत बताया।

दूसरी तरफ, इसराइल के एक्सपर्ट Sagiv Steinberg ने इसे कोई स्थायी शांति समझौता नहीं बल्कि सिर्फ 60 दिनों की एक अस्थायी व्यवस्था कहा है। ईरान की सरकारी मीडिया Mehr News के मुताबिक, इस ड्राफ्ट MOU में 14 पॉइंट्स शामिल हैं, जिनमें सैन्य अभियानों को रोकने और अमेरिकी हस्तक्षेप को खत्म करने जैसी बातें कही गई हैं।

Nura Basta

Nura Basta is the Editor at GulfHindi.com and a journalism graduate from IIMC Delhi. With more than 7 years of professional experience, he has worked with leading media organizations including Aaj Tak (2018–2021) and Gulf News (2021–2025). His reporting and editorial work primarily focus on Gulf news, current affairs, and issues relevant to the Indian diaspora. At GulfHindi.com, he is committed to providing credible, well-researched, and impactful content for Hindi readers in the Gulf.