अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव को समाप्त करने के लिए पाकिस्तान एक बड़ा कदम उठाने जा रहा है। सऊदी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान बिना दोनों देशों के प्रतिनिधियों की मौजूदगी के ही शांति समझौते से जुड़े समझौता ज्ञापन (MoU) की घोषणा स्वतंत्र रूप से करेगा। इस ऐतिहासिक समझौते को ‘इस्लामाबाद घोषणापत्र’ (Islamabad Declaration) नाम दिया गया है, जो दोनों देशों के बीच युद्ध को समाप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

समझौते के तहत क्या-क्या बदलाव होंगे और क्या है 3 चरणों का प्लान?

इस प्रस्तावित समझौते को तीन अलग-अलग चरणों में लागू किया जाएगा। पहले चरण में दोनों देशों के बीच चल रहे संघर्ष को औपचारिक रूप से समाप्त किया जाएगा। दूसरे चरण में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के संकट को हल किया जाएगा, जहां जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह टोल-फ्री बनाया जाएगा और ईरान वहां से अपनी बिछाई हुई समुद्री माइंस हटाएगा। तीसरे चरण के तहत 30 दिनों का बातचीत का समय शुरू होगा, जिसे जरूरत पड़ने पर आगे भी बढ़ाया जा सकता है। परमाणु मुद्दों से जुड़े संवेदनशील मामलों पर बाद में अलग से चर्चा की जाएगी।

पाकिस्तानी मध्यस्थता और वैश्विक नेताओं के बड़े बयान

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इसहाक डार ने रविवार को पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सकारात्मक और सार्थक प्रगति हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिया कि शांति समझौते का मसौदा काफी हद तक तैयार हो चुका है और यह अंतिम चरण में है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की है कि 14 बिंदुओं वाले इस अस्थायी राजनयिक समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस मध्यस्थता प्रक्रिया को सफल बनाने में लगातार प्रयासरत रहे हैं। अगले दौर की औपचारिक बातचीत 5 जून को होने की संभावना है।

Frequently Asked Questions (FAQs)

अमेरिका और ईरान के बीच इस समझौते के मुख्य बिंदु क्या हैं?

इस समझौते में 14 बिंदु शामिल हैं, जिसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को टोल-फ्री बनाना, ईरान द्वारा माइंस हटाना, संघर्ष को समाप्त करना और 30 दिनों की वार्ता अवधि शुरू करना शामिल है।

इस शांति समझौते में पाकिस्तान की क्या भूमिका है?

पाकिस्तान इस शांति वार्ता में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की देखरेख में इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा रहा है।