अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म हो सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिए हैं कि दोनों देशों के बीच युद्ध खत्म करने के लिए एक समझौता (MoU) लगभग तय हो चुका है। इस पूरी डील में पाकिस्तान ने अहम भूमिका निभाई है, जिससे दुनिया भर में शांति की उम्मीद जगी है।

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समझौते की मुख्य बातें और शर्तें

इस प्रस्तावित समझौते के तहत दोनों देश कई अहम बातों पर सहमत हुए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि इस डील के बाद सभी मोर्चों पर युद्ध खत्म हो जाएगा, जिसमें लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ चल रही लड़ाई भी शामिल है। ईरान के विदेश मंत्री ने बताया कि 47 साल में पहली बार अमेरिका ने ईरान की संप्रभुता का सम्मान करने की बात कही है।

  • दोनों देश एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे।
  • एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध शुरू करने या बल प्रयोग करने की धमकी नहीं देंगे।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जाएगा और अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी हटाई जाएगी।

दो चरणों में पूरा होगा यह प्रोसेस

यह शांति प्रक्रिया दो हिस्सों में पूरी होगी, ताकि दोनों पक्ष अपनी शर्तों को अच्छी तरह लागू कर सकें।

चरण (Phase) क्या होगा
पहला चरण शुरुआती समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।
दूसरा चरण 60 दिनों की बातचीत होगी जिसमें प्रतिबंधों में छूट, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा होगी।

पैसा और परमाणु कार्यक्रम पर विवाद

इस डील में पैसों और हथियारों को लेकर भी कुछ अहम बातें सामने आई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, बातचीत के 60 दिनों के दौरान ईरान की लगभग 24 अरब डॉलर की जमी हुई संपत्ति वापस मिल सकती है। परमाणु कार्यक्रम को लेकर अभी भी कुछ मतभेद हैं। ईरान चाहता है कि वह यूरेनियम संवर्धन जारी रखे, जबकि अमेरिका चाहता है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश पूरी तरह बंद कर दे और उच्च संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर भेजे।

पाकिस्तान की भूमिका और अन्य देशों का असर

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस डील में एक मध्यस्थ के रूप में काम किया है। उन्होंने घोषणा की कि शांति समझौते का अंतिम टेक्स्ट तैयार हो चुका है और अब अगले कदमों पर काम चल रहा है। इस समझौते का असर इजराइल पर भी पड़ेगा क्योंकि लेबनान में हिजबुल्लाह के साथ युद्ध विराम इस डील का हिस्सा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि यूरेनियम पर वैचारिक सहमति बन गई है, हालांकि उन्होंने ईरान के सरकारी मीडिया द्वारा दिखाए गए कुछ दावों को खारिज किया है।