अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा तनाव अब खत्म हो सकता है. पाकिस्तान की मध्यस्थता से दोनों देश एक शांति समझौते की ओर बढ़ रहे हैं. खबर है कि इस डील पर बहुत जल्द साइन हो सकते हैं, जिससे पूरी दुनिया में शांति लौटने की उम्मीद है.
समझौते की ताज़ा स्थिति और दावों का टकराव
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता अब पहले से कहीं ज़्यादा करीब है. उन्होंने कहा कि अगले 24 घंटों में इस डील का अंतिम ड्राफ्ट तैयार हो जाएगा और इसकी साइनिंग इलेक्ट्रॉनिक तरीके से होगी. इसके बाद अगले हफ्ते एक्सपर्ट्स के बीच तकनीकी बातचीत होगी.
वहीं, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह डील कल रविवार को साइन होने वाली है और इसके तुरंत बाद होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) सभी के लिए खोल दिया जाएगा. हालांकि, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाएई ने रविवार को साइनिंग होने की बात से इनकार किया है, लेकिन उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में ऐसा हो सकता है.
क्या होगा इस समझौते में
ईरान के मुताबिक, अभी जिस ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम’ पर चर्चा हो रही है, उसका मुख्य मकसद युद्ध को खत्म करना है. इसमें परमाणु मुद्दे (nuclear issue) को अभी शामिल नहीं किया गया है. ईरान ने साफ़ किया है कि उसके फंसे हुए पैसों की वापसी इस समझौते का सबसे ज़रूरी हिस्सा होगा.
इस संभावित समझौते की मुख्य शर्तें नीचे दी गई टेबल में समझें:
| मुख्य बिंदु | तय की गई संभावित शर्त |
|---|---|
| फंसे हुए पैसे | ईरान के 24 बिलियन डॉलर वापस किए जाएंगे, जिसमें से आधे पैसे बातचीत शुरू होने से पहले मिलेंगे. |
| प्रतिबंध | अमेरिका ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटाएगा. |
| होर्मुज जलडमरूमध्य | 30 दिनों के भीतर इसे खोला जाएगा, जिसका कंट्रोल ईरान और ओमान के पास रहेगा और वे सर्विस चार्ज लेंगे. |
| युद्ध विराम | लेबनान समेत सभी मोर्चों पर लड़ाई और दुश्मनी तुरंत खत्म होगी. |
| परमाणु मुद्दा | शुरुआती समझौते के 60 दिनों के बाद परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत होगी. |
| अमेरिकी सेना | अमेरिका ईरान के आस-पास के इलाकों से अपनी सेना वापस बुलाएगा. |
| संप्रभुता | अमेरिका ईरान के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देगा. |
बीच में बढ़ी तनातनी
एक तरफ शांति की बात चल रही है, तो दूसरी तरफ ज़मीनी हालात तनावपूर्ण रहे. शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना ने ईरान के कई अटैक ड्रोन मार गिराए. राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना को बिल्कुल अस्वीकार्य बताया. इसी बीच ईरान की सेना ने भी जलडमरूमध्य में जहाजों की ओर चेतावनी के लिए गोलियां चलाईं.
इस पूरे मामले में पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया है कि इस समझौते पर सऊदी अरब, यूएई, कतर और तुर्की जैसे देशों की सहमति है, हालांकि इजराइल के कुछ अधिकारियों ने इस बात पर चिंता जताई है.