अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रही तनातनी अब खत्म होने की राह पर है। पाकिस्तान की कोशिशों से दोनों देशों के बीच एक शांति समझौता हुआ है जिसे ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (MoU) का नाम दिया गया है। इस समझौते का मुख्य मकसद युद्ध को रोकना और क्षेत्रीय स्थिरता लाना है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने 18 जून 2026 को पुष्टि की कि अमेरिका और ईरान के राष्ट्रपतियों ने इस समझौते पर इलेक्ट्रॉनिक साइन कर दिए हैं और यह तुरंत लागू हो गया है। इस डील के तहत सभी मोर्चों पर सैन्य अभियान तुरंत और स्थायी रूप से बंद कर दिए जाएंगे, जिसमें लेबनान भी शामिल है।

इस समझौते की कुछ खास बातें नीचे दी गई हैं:

  • ईरान तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलेगा।
  • अमेरिका ईरान पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (naval blockade) को हटाएगा।
  • दोनों देशों के पास परमाणु कार्यक्रम जैसे बाकी बचे मुद्दों को सुलझाने के लिए 60 दिन का समय होगा।

इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान का अहम रोल रहा है। अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने मई के अंत में पाकिस्तान के विदेश मंत्री Mohammad Ishaq Dar के सकारात्मक योगदान के लिए उनका शुक्रिया अदा किया था। इसके अलावा, पाकिस्तान के चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ Field Marshal Asim Munir ने भी इस राजनयिक प्रक्रिया में बड़ी भूमिका निभाई।

बातचीत अभी रुकी नहीं है और अगले चरणों की तैयारी चल रही है। 22 जून 2026 को मिस्र (Egypt) में एक महत्वपूर्ण बैठक होगी, जिसमें पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के विदेश मंत्री हिस्सा लेंगे। इसी दिन स्विट्जरलैंड के Bürgenstock में अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की बातचीत भी होगी, जिसमें पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ के रूप में मौजूद रहेंगे।

ईरान के विदेश मंत्री Seyed Abbas Araghchi ने भी फोन पर पाकिस्तान के डिप्टी प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री Ishaq Dar का आभार जताया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Tahir Andrabi ने कहा कि देश शांति स्थापित करने के लिए अपनी कोशिशें जारी रखेगा।